ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत की पेशकश की है, लेकिन इसके लिए एक शर्त रखी है। ईरान का कहना है कि अगर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस्लामिक गणराज्य के खिलाफ अपनी धमकियां बंद कर देते हैं तो वह वार्ता के लिए तैयार है। इसके साथ ही ईरान ने यह भी चेतावनी दी है कि किसी भी सैन्य हमले से मध्य पूर्व में एक व्यापक संघर्ष छिड़ सकता है।
यह बयान ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी अराघची ने शुक्रवार को इस्तांबुल में अपने तुर्की समकक्ष हकन फिदान से मुलाकात के बाद दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इज़राइल राष्ट्रपति ट्रम्प को उनके देश पर हमला करने के लिए उकसा रहा है। अराघची ने जोर देकर कहा कि ईरान बातचीत के लिए जितना तैयार है, उतना ही “युद्ध के लिए भी तैयार” है।
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव उस समय नाटकीय रूप से बढ़ गया जब राष्ट्रपति ट्रम्प ने एक अमेरिकी विमान-वाहक स्ट्राइक ग्रुप को मध्य पूर्व में भेजने का आदेश दिया और ईरान पर हमला करने की धमकी दी। तेल-समृद्ध फारस की खाड़ी में एक नए युद्ध की आशंकाओं के कारण इस सप्ताह कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई, हालांकि ट्रम्प के ईरान के साथ चर्चा की बात कहने के बाद कीमतों में कुछ नरमी आई।
ईरान की बातचीत की पेशकश और शर्तें
ईरानी अधिकारी अराघची ने कहा कि यदि बातचीत निष्पक्ष और न्यायसंगत हो तो इस्लामिक गणराज्य ईरान इसमें भाग लेने के लिए तैयार है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि ईरान अपने मिसाइल कार्यक्रम पर कभी भी बातचीत नहीं करेगा, जिसे रोकना ट्रम्प प्रशासन की एक प्रमुख मांग रही है। अराघची ने कहा, “हम किसी भी परिस्थिति में कोई निर्देश या दबाव स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं।” ईरान की यह शर्त अमेरिका के उस रुख के विपरीत है जो एक नए परमाणु समझौते में मिसाइल कार्यक्रम को भी शामिल करना चाहता है।
सैन्य कार्रवाई पर ईरान की चेतावनी
बातचीत की पेशकश के साथ-साथ ईरान ने एक कड़ी चेतावनी भी जारी की। अराघची ने कहा कि अगर अमेरिका ईरान पर कोई और सैन्य हमला करता है, तो “स्थिति बहुत अलग होगी” और यह द्विपक्षीय युद्ध के दायरे से बाहर जा सकती है। उन्होंने पिछले जून में इज़राइल के साथ हुए संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान “12-दिवसीय युद्ध से पहले की तुलना में और भी अधिक तैयार है।” उस संघर्ष की समाप्ति प्रमुख ईरानी परमाणु स्थलों पर अमेरिका द्वारा भारी हवाई हमलों के साथ हुई थी।
तनाव के पीछे के कारण
दोनों देशों के बीच हालिया तनाव तब बढ़ा जब राष्ट्रपति ट्रम्प ने मध्य पूर्व में एक विमान-वाहक युद्ध समूह की तैनाती का आदेश दिया। अमेरिका का उद्देश्य ईरान पर अधिकतम दबाव बनाना है। शुरुआत में ट्रम्प प्रशासन का मकसद हालिया विरोध प्रदर्शनों पर ईरान की कार्रवाई के लिए उसके नेतृत्व को दंडित करना था, लेकिन बाद में यह एक नया और अधिक व्यापक परमाणु समझौता करने की दिशा में बदल गया। अमेरिका 2015 में हुए पिछले परमाणु समझौते से पहले ही अलग हो चुका है।
कच्चे तेल की कीमतों पर असर
फारस की खाड़ी में बढ़ते तनाव और युद्ध की आशंका के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार पर सीधा असर पड़ा। इस सप्ताह ब्रेंट क्रूड की कीमतों में लगभग 7% की वृद्धि हुई और यह 70 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो गया। हालांकि, शुक्रवार को कीमतों में कुछ नरमी आई, जब राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि उनकी ईरान के साथ चर्चा हुई है और उन्हें उम्मीद है कि यह जारी रहेगी।
कूटनीतिक गतिविधियां और पृष्ठभूमि
अराघची की इस्तांबुल यात्रा पिछले कुछ दिनों में हुई तेज कूटनीतिक गतिविधियों का हिस्सा है। मध्य पूर्व के कई प्रमुख देशों, जिनमें अमेरिका के सहयोगी कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात भी शामिल हैं, ने तनाव कम करने और तेहरान और वाशिंगटन के बीच गतिरोध का राजनयिक समाधान खोजने की आवश्यकता पर जोर दिया है। इन देशों की कोशिश है कि क्षेत्र में किसी भी प्रकार के सैन्य संघर्ष को टाला जा सके। अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।
ईरान ने बातचीत के लिए अपनी तत्परता व्यक्त की है, लेकिन साथ ही अपनी शर्तों और सैन्य तैयारी का भी स्पष्ट संकेत दिया है, जिससे मध्य पूर्व में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।
FAQs
ईरान ने अमेरिका से बातचीत के लिए क्या शर्त रखी है?
ईरान ने शर्त रखी है कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस्लामिक गणराज्य के खिलाफ अपनी धमकियां देना बंद कर दें तो वह बातचीत के लिए तैयार है। इसके अलावा, बातचीत निष्पक्ष और न्यायसंगत होनी चाहिए।
ईरान ने सैन्य हमले को लेकर क्या चेतावनी दी है?
ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका उस पर सैन्य हमला करता है तो यह एक व्यापक संघर्ष को जन्म दे सकता है जो द्विपक्षीय युद्ध के दायरे से बाहर जा सकता है।
अमेरिका और ईरान के बीच हालिया तनाव क्यों बढ़ा है?
तनाव तब बढ़ा जब राष्ट्रपति ट्रम्प ने मध्य पूर्व में एक अमेरिकी विमान-वाहक स्ट्राइक ग्रुप भेजा और ईरान पर हमला करने की धमकी दी। अमेरिका ईरान पर एक नया परमाणु समझौता करने के लिए दबाव बना रहा है।
इस तनाव का कच्चे तेल की कीमतों पर क्या असर पड़ा?
युद्ध की आशंका के कारण, ब्रेंट क्रूड तेल की कीमत इस सप्ताह लगभग 7% बढ़कर 70 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो गई। हालांकि, बाद में इसमें थोड़ी गिरावट आई।
ईरान किस कार्यक्रम पर कोई बातचीत नहीं करेगा?
ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी परिस्थिति में अपने मिसाइल कार्यक्रम को लेकर कोई बातचीत नहीं करेगा, जबकि यह अमेरिका की एक प्रमुख मांग रही है।
यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।


