भारत में स्वदेशी हाई-थ्रस्ट एयरो इंजन के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के तहत बेंगलुरु स्थित गैस टर्बाइन रिसर्च एस्टैब्लिशमेंट (GTRE) ने एक उन्नत हाई-थ्रस्ट क्लास एयरो इंजन (AHTCE) के निर्माण और असेंबली के लिए एक डेवलपमेंट-कम-प्रोडक्शन पार्टनर (DcPP) की पहचान करने के लिए औपचारिक रूप से एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EoI) जारी किया है।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य देश में एक ऐसा दीर्घकालिक औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करना है, जो उन्नत सैन्य एयरो गैस टर्बाइन इंजनों के पूरे जीवनचक्र का समर्थन करने में सक्षम हो। यह पहल एक अंतरराष्ट्रीय इंजन निर्माता के सहयोग से आगे बढ़ाई जा रही है, जिसमें यह सुनिश्चित किया जाएगा कि डिजाइन का स्वामित्व, विनिर्माण की गहराई और रखरखाव की क्षमता को चरणबद्ध तरीके से स्वदेशी बनाया जाए।
GTRE का यह दृष्टिकोण प्रयोगशाला-केंद्रित विकास से हटकर उद्योग-आधारित राष्ट्रीय प्रणोदन क्षमता के निर्माण की ओर एक रणनीतिक बदलाव को दर्शाता है। इस पहल से भारत की एयरो-इंजन प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता को मजबूत करने और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
कार्यक्रम का रणनीतिक दृष्टिकोण
DRDO का इरादा AHTCE कार्यक्रम के माध्यम से सिर्फ एक इंजन बनाना नहीं है, बल्कि डिजाइन, सटीक विनिर्माण, सिस्टम इंटीग्रेशन, योग्यता और दीर्घकालिक समर्थन तक फैली एक राष्ट्रीय क्षमता का निर्माण करना है। EoI में स्पष्ट रूप से ऐसी भारतीय रक्षा और एयरोस्पेस फर्मों को आमंत्रित किया गया है जो कड़े एयरवर्थनेस और प्रमाणन व्यवस्थाओं के तहत जटिल सिस्टम कार्यक्रमों को निष्पादित करने में सक्षम हैं। चयनित DcPP प्राथमिक औद्योगिक निष्पादन एजेंसी के रूप में कार्य करेगा, जो GTRE के इंजीनियरिंग आउटपुट को उड़ान-योग्य हार्डवेयर में बदलने के लिए जिम्मेदार होगा।
स्वदेशी इंजन कार्यक्रम का दायरा
प्रस्तावित इंजन एक आधुनिक टर्बोफैन आर्किटेक्चर के सभी पहलुओं को कवर करता है। इसके दायरे में लो-प्रेशर कंप्रेसर, हाई-प्रेशर कंप्रेसर, कम्बस्टर, हाई-प्रेशर टरबाइन, लो-प्रेशर टरबाइन और आफ्टरबर्नर जैसे प्रमुख टर्बोमशीनरी मॉड्यूल का निर्माण और असेंबली शामिल है। कार्यक्रम में 10 वर्षों की अवधि में 18 पूर्ण इंजनों के साथ-साथ लगभग 2,300 घटकों और उप-असेंबली का विकास और वितरण शामिल है। इसका उद्देश्य औद्योगिक भागीदार की क्षमता को घटक निर्माण से लेकर पूर्ण इंजन निर्माण, सत्यापन और रखरखाव तक उत्तरोत्तर बढ़ाना है।
चार-चरणीय निष्पादन मॉडल
GTRE ने इस कार्यक्रम के लिए चार-चरणों वाली निष्पादन संरचना को परिभाषित किया है ताकि क्षमता निर्माण एक नियंत्रित तरीके से हो सके।
पहले चरण में, DcPP विस्तृत इंजीनियरिंग, 2D ड्रॉइंग और 3D मॉडल तैयार करने में GTRE का समर्थन करेगा।
दूसरे चरण में, विनिर्माण योजना पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिसमें प्रक्रिया इंजीनियरिंग और औद्योगिक तैयारी शामिल होगी।
तीसरे चरण में, DcPP कच्चे माल की खरीद से लेकर घटकों, उप-असेंबलियों और मॉड्यूल का निर्माण करेगा।
चौथे और अंतिम चरण में, इंजन की असेंबली और एकीकरण की मुख्य जिम्मेदारी DcPP की होगी, जिसमें इंजन असेंबली बे, मॉड्यूल इंटीग्रेशन और अंतिम इंजन बिल्ड-अप शामिल है।
साझेदारों की भूमिका और रूपरेखा
इस कार्यक्रम में GTRE डिजाइन प्राधिकरण और कार्यक्रम का मालिक बना रहेगा। GTRE इंजीनियरिंग डेटा, सामग्री समर्थन और एयरवर्थनेस एजेंसियों के साथ समन्वय प्रदान करेगा। वहीं, DcPP औद्योगिक निष्पादन प्राधिकरण होगा, जो उत्पादन इंजीनियरिंग, औद्योगीकरण, गुणवत्ता आश्वासन और प्रमाणन के लिए जिम्मेदार होगा। यह ढांचा GTRE, अंतरराष्ट्रीय इंजन हाउस, प्रमाणन एजेंसियों और औद्योगिक भागीदार को एक संरचित राष्ट्रीय प्रणोदन पारिस्थितिकी तंत्र में एकीकृत करता है।
आवश्यक तकनीकी क्षमता और पात्रता
EoI में साझेदार के लिए व्यापक विनिर्माण और निरीक्षण बुनियादी ढांचे की आवश्यकता बताई गई है। इसमें मल्टी-एक्सिस CNC मशीनिंग, इलेक्ट्रॉन बीम वेल्डिंग, लेजर प्रोसेसिंग और उन्नत कोटिंग्स जैसी तकनीकें शामिल हैं। चयन प्रक्रिया पांच स्तंभों पर आधारित होगी: वित्तीय, तकनीकी, विनिर्माण, असेंबली और निरीक्षण बुनियादी ढांचा, और विशेष प्रक्रिया अनुमोदन। केवल एयरो-इंजन या टर्बोमशीनरी अनुभव वाली भारतीय रक्षा या एयरोस्पेस कंपनियां ही इसके लिए पात्र हैं।
बौद्धिक संपदा अधिकार और भविष्य की योजना
कार्यक्रम के तहत उत्पन्न होने वाली सभी बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) भारत सरकार या DRDO-GTRE द्वारा निर्धारित विकास भागीदार के साथ संयुक्त रूप से रहेगी। साझेदार को श्रृंखला उत्पादन के लिए प्रतिबंधित विनिर्माण अधिकार मिल सकते हैं, लेकिन इंजन डिजाइन का स्वतंत्र वाणिज्यिक स्वामित्व नहीं मिलेगा। हालांकि यह तत्काल अनुबंध का हिस्सा नहीं है, लेकिन रक्षा मंत्रालय ने भविष्य में 200 इंजनों तक के उत्पादन ऑर्डर देने का इरादा भी जताया है।
यह कार्यक्रम भारत की एयरोस्पेस यात्रा में एक महत्वपूर्ण मोड़ का प्रतीक है। यह प्रणोदन को एक प्रयोगशाला प्रयास से एक राष्ट्रीय औद्योगिक मिशन में बदल देता है। चयनित DcPP न केवल इंजन बनाएगा, बल्कि भारत के पहले व्यापक सैन्य एयरो-इंजन उत्पादन पारिस्थितिकी तंत्र को स्थापित करने में भी मदद करेगा।
FAQs
यह कार्यक्रम क्या है?
यह भारत सरकार के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा शुरू किया गया एक कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य भारतीय उद्योग के साथ मिलकर एक स्वदेशी उन्नत हाई-थ्रस्ट क्लास एयरो इंजन (AHTCE) का विकास और निर्माण करना है।
GTRE और DcPP की क्या भूमिका होगी?
गैस टर्बाइन रिसर्च एस्टैब्लिशमेंट (GTRE) इस कार्यक्रम में डिजाइन प्राधिकरण होगा, जो इंजीनियरिंग डेटा और तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करेगा। डेवलपमेंट-कम-प्रोडक्शन पार्टनर (DcPP) एक औद्योगिक एजेंसी होगी जो इंजन के निर्माण, असेंबली और एकीकरण के लिए जिम्मेदार होगी।
प्रारंभिक चरण में कितने इंजन बनाने की योजना है?
कार्यक्रम के तहत 10 साल की अवधि में 18 पूर्ण इंजन और लगभग 2,300 संबंधित घटकों को विकसित और वितरित करने की योजना है।
कौन सी कंपनियां इस कार्यक्रम के लिए आवेदन कर सकती हैं?
केवल भारतीय रक्षा या एयरोस्पेस क्षेत्र की वे कंपनियां आवेदन कर सकती हैं, जिनके पास एयरो-इंजन या टर्बोमशीनरी के क्षेत्र में सिद्ध अनुभव हो और आवश्यक तकनीकी व वित्तीय क्षमता हो।
इंजन के बौद्धिक संपदा अधिकार किसके पास होंगे?
कार्यक्रम के तहत उत्पन्न सभी बौद्धिक संपदा (IP) अधिकार भारत सरकार के स्वामित्व में रहेंगे, जिनका प्रबंधन DRDO-GTRE द्वारा किया जाएगा। चयनित औद्योगिक भागीदार को केवल श्रृंखला उत्पादन के लिए सीमित अधिकार दिए जाएंगे।
यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।


