जम्मू और कश्मीर के डोडा जिले में गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर, स्थानीय ग्रामीणों ने भारी बर्फबारी के बीच फंसे 20 से अधिक सैन्य कर्मियों को बचाने के लिए एक साहसी अभियान को अंजाम दिया। लगभग 11,000 फीट की ऊंचाई पर, 5 से 6 फीट गहरी बर्फ में फंसे सैनिकों तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों ने करीब 15 किलोमीटर की पैदल यात्रा की।
यह बचाव अभियान पहाड़ी इलाके में लगभग पांच घंटे तक चला। साधारण उपकरणों से लैस ग्रामीणों ने बर्फ के बीच से एक संकरा रास्ता बनाया और फंसे हुए सैनिकों तक पहुंचे। यह घटना प्रतिकूल परिस्थितियों में दृढ़ संकल्प और नागरिक-सैन्य एकजुटता का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है।
जानकारी के अनुसार, सेना के यह जवान 23 जनवरी को भारी बर्फबारी के बाद फंस गए थे, जब वे एक आतंकवाद विरोधी तलाशी अभियान चला रहे थे। सेना से मदद का संदेश मिलने के बाद, स्थानीय सैन्य चौकी ने ग्रामीणों से सहायता का अनुरोध किया, जिसके बाद यह सफल बचाव अभियान चलाया गया।
बचाव अभियान का विवरण
23 जनवरी को भारी बर्फबारी के कारण सैन्य कर्मियों के फंस जाने के बाद, उन्होंने अपने बेस कैंप को एक संदेश भेजा। इसके बाद, गुंडना में स्थित भारतीय सेना की पोस्ट के अधिकारियों ने 24 जनवरी की शाम को सहायता के लिए स्थानीय ग्रामीणों से संपर्क किया।
बचाव दल में शामिल एक ग्रामीण के अनुसार, उन्होंने 25 जनवरी को सुबह करीब 8.30 बजे बचाव अभियान शुरू किया। सेना ने उन्हें जूते, दस्ताने और भोजन के पैकेट उपलब्ध कराए, जबकि ग्रामीण अपने साथ फावड़े लेकर गए थे। उन्होंने बर्फ के बीच से मोर्चा टॉप की ओर रास्ता बनाना शुरू किया और दोपहर 1.30 बजे तक सैनिकों तक पहुंच गए। शाम तक सभी जवानों को सुरक्षित नीचे लाया गया। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल सुनील बरतवाल ने पुष्टि की कि नागरिकों ने पहाड़ी इलाके में बर्फ से रास्ता बनाने के लिए सेना का साथ दिया।
सैन्य अभियान की पृष्ठभूमि
यह सैन्य टुकड़ी घने जंगलों में लगभग दो सप्ताह से चल रहे ‘ऑपरेशन त्राशी-1’ का हिस्सा थी। उन्हें गुंडना ब्लॉक में मोर्चा टॉप पर तैनात किया गया था, जो किश्तवाड़ जिले के छत्रु इलाके से सटी एक पहाड़ी चोटी है। यह तैनाती आतंकवादियों को किश्तवाड़ से डोडा जिले में घुसने से रोकने के उद्देश्य से की गई थी।
इस क्षेत्र में तलाशी अभियान 18 जनवरी को छत्रु के सिंहपोरा इलाके में आतंकवादियों के साथ हुई एक मुठभेड़ के बाद तेज कर दिया गया था। उस मुठभेड़ में विशेष बल के एक हवलदार गजेंद्र सिंह शहीद हो गए थे और सात अन्य सैनिक घायल हो गए थे।
BRO द्वारा एक और बचाव कार्य
उसी दिन, सीमा सड़क संगठन (BRO) ने डोडा जिले में भदेरवाह-चम्बा अंतर-राज्यीय सड़क पर 11,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित चतरगला टॉप पर एक और बचाव अभियान चलाया। 26 जनवरी की सुबह समाप्त हुए इस ऑपरेशन में, BRO ने 40 सैन्य कर्मियों और लगभग 20 नागरिकों को सुरक्षित बचाया।
भारी बर्फबारी का प्रभाव
डोडा और किश्तवाड़ जिलों में भारी बर्फबारी के कारण सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। किश्तवाड़ की दूरस्थ वारवान घाटी में एक हिमस्खलन की भी सूचना है, जिसके कारण पशुओं के चरागाह क्षेत्र प्रभावित हुए हैं। यह स्थानीय लोगों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है, क्योंकि उनकी आजीविका पशुधन पर निर्भर करती है।
गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर डोडा जिले के ग्रामीणों द्वारा दिखाया गया साहस और एकजुटता असाधारण है। उन्होंने प्रतिकूल मौसम और कठिन भूभाग की परवाह न करते हुए बर्फ में फंसे 20 से अधिक सैनिकों को सुरक्षित बचाया। इसी दौरान BRO द्वारा किया गया एक और बचाव कार्य क्षेत्र में भारी बर्फबारी से उत्पन्न चुनौतियों को दर्शाता है।
FAQs
सेना के जवान कहाँ फंसे हुए थे?
सेना के जवान जम्मू और कश्मीर के डोडा जिले में गुंडना ब्लॉक के मोर्चा टॉप पर लगभग 11,000 फीट की ऊंचाई पर फंसे हुए थे।
यह बचाव अभियान कब और कैसे हुआ?
बचाव अभियान 25 जनवरी को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर हुआ। स्थानीय ग्रामीणों ने लगभग 15 किलोमीटर पैदल चलकर और बर्फ काटकर रास्ता बनाया और सैनिकों को सुरक्षित नीचे लाए।
सैनिक उस इलाके में क्यों तैनात थे?
सैनिक ‘ऑपरेशन त्राशी-1’ के तहत एक आतंकवाद विरोधी तलाशी अभियान चला रहे थे, जिसका उद्देश्य आतंकवादियों को किश्तवाड़ से डोडा जिले में घुसने से रोकना था।
क्या इसी दौरान कोई और बचाव अभियान भी चलाया गया था?
हाँ, उसी दिन सीमा सड़क संगठन (BRO) ने चतरगला टॉप पर एक और बचाव अभियान चलाया, जिसमें 40 सैन्य कर्मियों और 20 नागरिकों को बचाया गया।
भारी बर्फबारी का क्षेत्र पर क्या प्रभाव पड़ा है?
भारी बर्फबारी ने डोडा और किश्तवाड़ जिलों में सामान्य जीवन को बाधित कर दिया है। किश्तवाड़ की वारवान घाटी में एक हिमस्खलन भी हुआ, जिससे स्थानीय लोगों के चरागाह क्षेत्र प्रभावित हुए।
यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।


