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गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार दिखेगी लाइव कॉम्बैट व्यूह रचना

सोमवार को कर्तव्य पथ पर आयोजित होने वाली 77वीं गणतंत्र दिवस परेड में भारत की सैन्य शक्ति, तकनीकी आत्मनिर्भरता और सशस्त्र बलों के बीच तालमेल का एक अभूतपूर्व युद्ध-उन्मुख प्रदर्शन किया जाएगा। यह परेड भारत की बढ़ती सैन्य क्षमताओं और स्वदेशी रक्षा उद्योग की प्रगति को दर्शाएगी।

नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस वार्ता में, दिल्ली क्षेत्र के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल नवराज ढिल्लों ने 2026 के लिए गणतंत्र दिवस परेड और बीटिंग रिट्रीट समारोह की समग्र संरचना और विशिष्ट विशेषताओं की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि इस वर्ष का उत्सव एकीकृत युद्ध संरचनाओं, स्वदेशी सैन्य प्लेटफार्मों और अंतर-सेवा समन्वय पर केंद्रित होगा।

मेजर जनरल ढिल्लों ने परेड के प्रमुख औपचारिक और परिचालन तत्वों का विवरण दिया, जिसमें आधुनिक युद्ध की जरूरतों के अनुसार खुफिया, निगरानी और नेटवर्क-केंद्रित संचालन पर आधारित सेना की तैयारियों पर जोर दिया गया। इस कार्यक्रम में पहली बार एक लाइव युद्ध व्यूह संरचना का प्रदर्शन किया जाएगा, जो भारतीय सेना की आक्रामक क्षमताओं को प्रदर्शित करेगा।

परेड का समय और मार्ग

गणतंत्र दिवस परेड सुबह 10.30 बजे शुरू होगी और लगभग 90 मिनट तक चलेगी। परंपरा के अनुसार, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि देकर दिन की शुरुआत करेंगे। इसके बाद राष्ट्रपति का आगमन होगा, जिन्हें 21 तोपों की सलामी दी जाएगी।

यह औपचारिक जुलूस रायसीना हिल के विजय चौक से शुरू होगा, कर्तव्य पथ से होते हुए इंडिया गेट को पार करेगा और तिलक मार्ग के माध्यम से लाल किले पर समाप्त होगा। यह परेड भारत की सैन्य शक्ति के साथ-साथ उसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है, जिसे दुनिया भर में देखा जाता है।

मुख्य अतिथि और अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी

इस वर्ष के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा शामिल होंगे। यह भारत और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों को दर्शाता है।

यूरोपीय संघ के नेतृत्व के साथ कर्नल रैंक के अधिकारियों के नेतृत्व में एक औपचारिक टुकड़ी और चार ध्वजवाहक भी परेड में हिस्सा लेंगे। उनकी उपस्थिति इस राष्ट्रीय पर्व को एक अंतर्राष्ट्रीय आयाम प्रदान करती है।

पहली बार प्रदर्शित होगा ‘बैटल ऐरे फॉर्मेशन’

इतिहास में पहली बार, गणतंत्र दिवस परेड में एक लाइव ‘बैटल ऐरे फॉर्मेशन’ (युद्ध व्यूह संरचना) का प्रदर्शन किया जाएगा। यह भारतीय सेना के एक एकीकृत और आक्रामक लड़ाकू समूह को चित्रित करेगा। यह संरचना सेना की तैयारी, लचीलेपन और जवाबी कार्रवाई की क्षमता को दर्शाएगी।

इस युद्ध व्यूह में मशीनीकृत बलों, विमानन तत्वों, विशेष बलों और तोपखाने के बीच घनिष्ठ समन्वय का प्रदर्शन होगा। इसे लंबी दूरी के निगरानी ड्रोन, स्वायत्त प्लेटफार्मों और मानवरहित जमीनी वाहनों का समर्थन प्राप्त होगा, जो आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति को दर्शाता है।

स्वदेशी सैन्य उपकरण और नई यूनिटें

परेड में कई नए फॉर्मेशन और उपकरण पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किए जाएंगे। इनमें ‘शक्तिबाण आर्टिलरी रेजिमेंट’ (ड्रोन और लॉइटरिंग मूनिशन युद्ध में विशेषज्ञ), ‘दिव्यास्त्र बैटरी’ (पारंपरिक तोपखाने को सटीक ड्रोन के साथ एकीकृत करने वाली हाइब्रिड यूनिट), और ‘भैरव लाइट कमांडो बटालियन’ (विशेष अभियानों के लिए फुर्तीली संरचनाएं) शामिल हैं।

मशीनीकृत स्तंभों में टी-90 भीष्म टैंक, अर्जुन मुख्य युद्धक टैंक, और बीएमपी-2 सारथ जैसे प्रमुख लड़ाकू प्लेटफॉर्म शामिल होंगे। इसके अलावा, स्वदेशी रक्षा प्रणालियों में एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम (ATAGS), धनुष तोप, ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल, और आकाश व एमआर-सैम वायु रक्षा प्रणाली का भी प्रदर्शन किया जाएगा।

परेड की कमान और प्रतिभागी

परेड की कमान लेफ्टिनेंट जनरल भवनीश कुमार, एवीएसएम, वीएसएम संभालेंगे, जबकि मेजर जनरल नवराज ढिल्लों सेकेंड-इन-कमांड होंगे। इस परेड में लगभग 6,050 कर्मी भाग लेंगे, जिनमें 514 महिलाएं शामिल हैं।

परमवीर चक्र और अशोक चक्र से सम्मानित युद्ध नायकों में सूबेदार मेजर (मानद कैप्टन) योगेंद्र सिंह यादव और सूबेदार मेजर (मानद लेफ्टिनेंट) संजय कुमार भी परेड का हिस्सा होंगे।

हवाई प्रदर्शन और झांकियां

परेड के हवाई घटक में ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर, अपाचे एएच-64ई, और लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (एलसीएच) शामिल होंगे। फ्लाईपास्ट के दौरान लड़ाकू, परिवहन और हेलीकॉप्टर सहित कुल 20 विमान विभिन्न संरचनाओं में भाग लेंगे।

राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और मंत्रालयों की कुल 30 झांकियां कर्तव्य पथ पर निकलेंगी। इनमें भारतीय नौसेना की झांकी, एक वेटरन्स झांकी और मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ द्वारा प्रस्तुत एक त्रि-सेवा झांकी भी शामिल होगी। त्रि-सेवा झांकी का विषय ‘ऑपरेशन सिंदूर: विजय थ्रू जॉइंटनेस’ है, जो एकीकृत संचालन और आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।

बीटिंग रिट्रीट समारोह

गणतंत्र दिवस समारोह का औपचारिक समापन 29 जनवरी को विजय चौक पर आयोजित होने वाले बीटिंग रिट्रीट समारोह के साथ होगा। इसमें सेना, नौसेना, वायु सेना और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के बैंड द्वारा भारतीय धुनों की मनमोहक प्रस्तुति दी जाएगी।

वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, 2026 की गणतंत्र दिवस परेड भारत की बढ़ती सैन्य क्षमता, स्वदेशी नवाचार और संयुक्त परिचालन सिद्धांत को दर्शाती है, जो एक आत्मविश्वासी और आत्मनिर्भर राष्ट्र का संदेश देती है।

FAQs

77वीं गणतंत्र दिवस परेड कब और कहाँ होगी?

77वीं गणतंत्र दिवस परेड सोमवार को नई दिल्ली में कर्तव्य पथ पर आयोजित की जाएगी। यह सुबह 10:30 बजे शुरू होगी।

इस वर्ष के मुख्य अतिथि कौन हैं?

इस वर्ष के मुख्य अतिथि यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा हैं।

परेड में पहली बार क्या खास देखने को मिलेगा?

इस परेड में पहली बार एक लाइव ‘बैटल ऐरे फॉर्मेशन’ का प्रदर्शन किया जाएगा, जो भारतीय सेना की एकीकृत आक्रामक युद्ध क्षमताओं को दर्शाएगा।

कौन-कौन से स्वदेशी हथियार प्रदर्शित किए जाएंगे?

परेड में एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम (ATAGS), धनुष तोप, ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल, और आकाश एयर डिफेंस सिस्टम जैसे कई स्वदेशी हथियार प्रदर्शित किए जाएंगे।

बीटिंग रिट्रीट समारोह का आयोजन कब होगा?

बीटिंग रिट्रीट समारोह का आयोजन 29 जनवरी को विजय चौक पर किया जाएगा, जो गणतंत्र दिवस समारोह के औपचारिक समापन का प्रतीक है।

यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।

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