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केरल: आर्य वैद्य शाला के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री का संबोधन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल के कोट्टक्कल में स्थित आर्य वैद्य शाला चैरिटेबल अस्पताल के शताब्दी समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने संस्थान की एक सदी की यात्रा और समाज सेवा में उसके योगदान की सराहना की। प्रधानमंत्री ने भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों, विशेषकर आयुर्वेद के महत्व पर प्रकाश डाला और इसे वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने की सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।

अपने संबोधन में, प्रधानमंत्री ने आर्य वैद्य शाला के संस्थापक, वैद्यरत्नम पी.एस. वारियर को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि वारियर ने भारतीय परंपराओं और आधुनिक विज्ञान के समन्वय से स्वास्थ्य सेवा का एक अनूठा मॉडल प्रस्तुत किया। यह अस्पताल पिछले 100 वर्षों से गरीबों और वंचितों की सेवा कर रहा है, जो मानवता की सेवा का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की स्वास्थ्य सेवा की परिकल्पना केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कल्याण पर आधारित है। उन्होंने उल्लेख किया कि सरकार की नीतियां समग्र स्वास्थ्य सेवा को बढ़ावा देने पर केंद्रित हैं, जिसमें पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली के साथ एकीकृत किया जा रहा है।

इस कार्यक्रम के माध्यम से उन्होंने आयुर्वेद के क्षेत्र में काम कर रहे विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं से आग्रह किया कि वे साक्ष्य-आधारित चिकित्सा पर ध्यान केंद्रित करें ताकि वैश्विक मानकों पर भारतीय चिकित्सा पद्धतियों की स्वीकार्यता और बढ़ सके।

प्रधानमंत्री का संबोधन और आर्य वैद्य शाला की सराहना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्य वैद्य शाला चैरिटेबल अस्पताल के 100 वर्ष पूरे होने पर संस्थान से जुड़े सभी लोगों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह संस्थान वैद्यरत्नम पी.एस. वारियर की दूरदर्शी सोच का परिणाम है, जिन्होंने गरीबों की सेवा के लिए इसे स्थापित किया। प्रधानमंत्री ने इस बात का उल्लेख किया कि कैसे एक छोटे से पौधे के रूप में शुरू हुआ यह संस्थान आज आयुर्वेद के एक विशाल वटवृक्ष के रूप में विकसित हो चुका है। उन्होंने संस्थान द्वारा स्वास्थ्य सेवा के साथ-साथ शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की भी प्रशंसा की।

समग्र स्वास्थ्य सेवा और पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार देश में एक समग्र स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण कर रही है। इसके तहत, आयुष मंत्रालय का गठन किया गया, जो आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है। उन्होंने राष्ट्रीय आयुष मिशन का भी उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य देश भर में आयुष स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाना है। प्रधानमंत्री के अनुसार, पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को आधुनिक चिकित्सा के साथ एकीकृत करने से लोगों को बेहतर और किफायती स्वास्थ्य समाधान मिलेंगे।

आयुर्वेद का वैश्विक विस्तार और ‘हील इन इंडिया’ पहल

प्रधानमंत्री मोदी ने आयुर्वेद की वैश्विक क्षमता पर जोर दिया। उन्होंने गुजरात के जामनगर में स्थापित विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के पारंपरिक चिकित्सा के लिए वैश्विक केंद्र का जिक्र करते हुए कहा कि यह भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को वैश्विक मान्यता दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने ‘हील इन इंडिया’ और ‘हील बाय इंडिया’ जैसी पहलों का भी उल्लेख किया, जिनका उद्देश्य भारत को चिकित्सा पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र बनाना और भारतीय स्वास्थ्य पेशेवरों को दुनिया भर में अपनी सेवाएं प्रदान करने के अवसर उपलब्ध कराना है।

अनुसंधान और मानकीकरण पर जोर

प्रधानमंत्री ने आयुर्वेद समुदाय से अनुसंधान, दस्तावेजीकरण और मानकीकरण की प्रक्रिया को तेज करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर आयुर्वेद की स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए यह आवश्यक है कि इसके प्रभावों को आधुनिक वैज्ञानिक मापदंडों पर प्रमाणित किया जाए। उन्होंने शोधकर्ताओं से आग्रह किया कि वे अधिक से अधिक शोध पत्र अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित करें ताकि दुनिया भारतीय चिकित्सा विज्ञान की शक्ति को समझ सके।

कोट्टक्कल आर्य वैद्य शाला: एक संक्षिप्त परिचय

कोट्टक्कल आर्य वैद्य शाला की स्थापना वर्ष 1902 में प्रसिद्ध आयुर्वेदिक चिकित्सक और दूरदर्शी वैद्यरत्नम पी.एस. वारियर द्वारा केरल के मलप्पुरम जिले में की गई थी। यह संस्थान आयुर्वेद के उपचार, शिक्षा और अनुसंधान के लिए एक प्रमुख केंद्र माना जाता है। इसके चैरिटेबल अस्पताल की शुरुआत समाज के जरूरतमंद वर्गों को निःशुल्क और रियायती दरों पर गुणवत्तापूर्ण आयुर्वेदिक उपचार प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी, जिसने अब अपनी सेवा के 100 वर्ष सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में आर्य वैद्य शाला के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान भारत की समृद्ध विरासत और सेवा भावना का प्रतीक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह संस्थान आने वाले वर्षों में भी मानवता की सेवा करता रहेगा और आयुर्वेद के ज्ञान को दुनिया भर में प्रसारित करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

FAQs

प्रधानमंत्री मोदी ने किस कार्यक्रम को संबोधित किया?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल के कोट्टक्कल में आर्य वैद्य शाला चैरिटेबल अस्पताल के शताब्दी समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित किया।

आर्य वैद्य शाला की स्थापना किसने की थी?

आर्य वैद्य शाला की स्थापना वर्ष 1902 में वैद्यरत्नम पी.एस. वारियर द्वारा की गई थी, जो एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक विद्वान और चिकित्सक थे।

‘हील इन इंडिया’ पहल का क्या उद्देश्य है?

‘हील इन इंडिया’ पहल का मुख्य उद्देश्य भारत को चिकित्सा और कल्याण के लिए एक वैश्विक गंतव्य के रूप में बढ़ावा देना है, जिससे विदेशी नागरिक उपचार के लिए भारत आएं।

भारत में पारंपरिक चिकित्सा को कौन सा मंत्रालय देखता है?

भारत में आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी (आयुष) सहित पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को बढ़ावा देने और विनियमित करने का कार्य आयुष मंत्रालय करता है।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में किस वैश्विक केंद्र का उल्लेख किया?

प्रधानमंत्री ने गुजरात के जामनगर में स्थापित विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के पारंपरिक चिकित्सा के लिए वैश्विक केंद्र का उल्लेख किया।

यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।

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