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ऑस्ट्रेलिया: ऑफशोर विंड से सुरक्षा को खतरा, जोखिम मूल्यांकन की जरूरत

ऑस्ट्रेलिया में प्रस्तावित ऑफशोर विंड फार्म परियोजनाओं को लेकर गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताएं सामने आई हैं। विशेषज्ञों ने इन परियोजनाओं को तब तक रोकने का आग्रह किया है जब तक कि इनका व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिम मूल्यांकन पूरा नहीं हो जाता। यह मांग इसलिए की जा रही है क्योंकि इन विशाल संरचनाओं से देश की सैन्य निगरानी, पनडुब्बी का पता लगाने की क्षमताओं और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

यह मामला केवल ऊर्जा और जलवायु नीति तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अब इसे रक्षा, खुफिया और साइबर सुरक्षा से जुड़ा एक रणनीतिक मुद्दा माना जा रहा है। अमेरिका और यूरोप के कई देश पहले ही ऑफशोर विंड फार्म को एक रणनीतिक संपत्ति के रूप में देख रहे हैं और इससे जुड़े सुरक्षा जोखिमों का पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं। इन चिंताओं में चीनी कंपनियों द्वारा निर्मित प्रणालियों से उत्पन्न होने वाले जासूसी और आपूर्ति श्रृंखला के खतरे भी शामिल हैं।

ऑस्ट्रेलिया के कई प्रस्तावित विंड जोन नौसैनिक अड्डों, वायु सेना के ठिकानों, पनडुब्बी संचालन क्षेत्रों और पानी के नीचे मौजूद केबल मार्गों जैसे महत्वपूर्ण स्थानों के करीब स्थित हैं। इन परियोजनाओं से उत्पन्न होने वाले रडार और सोनार व्यवधान देश की रक्षा तैयारियों को कमजोर कर सकते हैं। इसी को देखते हुए, नीति निर्माताओं से ऊर्जा और रक्षा नीतियों में बेहतर तालमेल स्थापित करने और कोई भी निर्णय लेने से पहले सभी सुरक्षा पहलुओं पर विचार करने की मांग की जा रही है।

राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी मुख्य चिंताएं

ऑस्ट्रेलिया में यह तर्क दिया जा रहा है कि ऑफशोर विंड फार्म के विकास को व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिम मूल्यांकन पूरा होने तक रोक देना चाहिए। इसमें विशेष रूप से चीनी कंपनियों द्वारा निर्मित या नियंत्रित प्रणालियों को महत्वपूर्ण बंदरगाहों, नौसैनिक सुविधाओं और पनडुब्बी संचालन क्षेत्रों के पास प्रतिबंधित करने की मांग शामिल है। चिंता यह है कि इन टरबाइनों के रखरखाव के लिए निर्माताओं, जो अक्सर चीनी फर्म होती हैं, को निरंतर भौतिक और डिजिटल पहुंच देनी पड़ती है, जिससे जासूसी का खतरा पैदा हो सकता है।

अन्य देशों द्वारा उठाए गए कदम

कई पश्चिमी देशों ने पहले ही इस मुद्दे पर कार्रवाई की है। स्वीडन ने राष्ट्रीय रक्षा के लिए “अस्वीकार्य जोखिम” का हवाला देते हुए 13 ऑफशोर विंड परियोजनाओं को रद्द कर दिया। स्वीडिश रक्षा मंत्री पाल जोंसन के अनुसार, ये फार्म खुफिया जानकारी इकट्ठा करने की क्षमता को कम कर सकते थे और पनडुब्बियों का पता लगाने वाले सेंसर को बाधित कर सकते थे। उन्होंने यह भी कहा कि इन फार्मों के कारण मिसाइल हमले की स्थिति में प्रतिक्रिया का समय 2 मिनट से घटकर 60 सेकंड हो सकता था। इसी तरह, अमेरिका ने भी राष्ट्रीय सुरक्षा आधार पर ऑफशोर विंड निर्माण को रोका है, जबकि जर्मनी ने NATO जलक्षेत्र के पास चीनी निर्मित टरबाइनों से उत्पन्न निगरानी और आपूर्ति-श्रृंखला के खतरों पर चिंता व्यक्त की है।

तकनीकी और सैन्य चुनौतियां

ऑफशोर विंड फार्म से दो प्रमुख तकनीकी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। पहला, टरबाइन टावर और घूमते हुए ब्लेड रडार में अव्यवस्था (clutter) पैदा करते हैं, जिससे सतह पर मौजूद जहाजों और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों का पता लगाना और उन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। दूसरा, ये संरचनाएं पानी के नीचे लगातार ध्वनि उत्पन्न करती हैं। यह ध्वनि पनडुब्बियों की निगरानी के लिए उपयोग की जाने वाली सोनार-आधारित प्रणालियों और समुद्र तल पर लगे सेंसर के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है, जिससे पनडुब्बी युद्ध और पानी के नीचे के बुनियादी ढांचे की सुरक्षा कमजोर हो सकती है।

ऑस्ट्रेलिया के संवेदनशील क्षेत्रों में परियोजनाएं

ऑस्ट्रेलिया में घोषित कई ऑफशोर विंड जोन वायु सेना के ठिकानों, नौसैनिक विमानन गलियारों, पनडुब्बी संचालन और प्रशिक्षण क्षेत्रों और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे के रूप में नामित बंदरगाहों के करीब स्थित हैं। उदाहरण के लिए, न्यूकैसल के बंदरगाह और वोलोंगोंग के पोर्ट केम्बला के पास विंड जोन प्रस्तावित हैं, जहाँ भविष्य में पनडुब्बी बेस भी बन सकता है। न्यूकैसल में ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा फाइटर बेस भी स्थित है, जो इस क्षेत्र की रणनीतिक संवेदनशीलता को और बढ़ाता है। पूर्व विपक्षी रक्षा प्रवक्ता एंड्रयू हैस्टी ने 2024 में एक संसदीय प्रस्तुति में चेतावनी दी थी कि ये प्रस्ताव ऑस्ट्रेलिया की संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण चिंताएं पैदा करते हैं।

यह बहस ऊर्जा नीति, रक्षा योजना, साइबर सुरक्षा और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को अलग-अलग देखने के बजाय एक एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल देती है। ऑस्ट्रेलिया के अंतरराष्ट्रीय साझेदार अब रक्षा संबंधी चिंताओं को परियोजनाओं की योजना के शुरुआती चरणों में ही शामिल कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया के लिए भी यह आवश्यक हो गया है कि वह ऑफशोर विंड परियोजनाओं को केवल ऊर्जा के स्रोत के रूप में न देखे, बल्कि एक महत्वपूर्ण रणनीतिक मुद्दे के रूप में इसका मूल्यांकन करे।

FAQs

ऑस्ट्रेलिया में ऑफशोर विंड फार्म को लेकर मुख्य चिंता क्या है?

मुख्य चिंता राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी है, जिसमें सैन्य रडार और सोनार प्रणालियों में हस्तक्षेप, महत्वपूर्ण रक्षा बुनियादी ढांचे के पास उनकी स्थिति और चीनी निर्मित उपकरणों से उत्पन्न होने वाले जासूसी के जोखिम शामिल हैं।

क्या अन्य देशों ने भी ऐसी चिंताएं जताई हैं?

हाँ, अमेरिका, स्वीडन और जर्मनी जैसे देशों ने समान राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं के कारण अपतटीय पवन परियोजनाओं का पुनर्मूल्यांकन किया है या उन्हें रद्द कर दिया है।

विंड टरबाइन सैन्य प्रणालियों को कैसे प्रभावित करते हैं?

टरबाइन के टावर और घूमते ब्लेड रडार में बाधा उत्पन्न कर सकते हैं, जिससे जहाजों और विमानों को ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। वे पानी के नीचे ध्वनि भी उत्पन्न करते हैं जो पनडुब्बी का पता लगाने वाली सोनार प्रणालियों को बाधित कर सकती है।

चीनी कंपनियों की भूमिका पर क्या चिंता है?

चिंता यह है कि चीनी निर्माताओं को टरबाइनों के रखरखाव के लिए निरंतर भौतिक और डिजिटल पहुंच की आवश्यकता हो सकती है, जिससे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के पास निगरानी और आपूर्ति-श्रृंखला की कमजोरियों का खतरा बढ़ जाता है।

स्वीडन ने विंड फार्म परियोजनाओं को क्यों रद्द किया?

स्वीडन के सशस्त्र बलों ने मूल्यांकन किया कि ये परियोजनाएं राष्ट्रीय रक्षा के लिए एक अस्वीकार्य जोखिम पैदा करती हैं, जिसमें खुफिया जानकारी इकट्ठा करने की क्षमताओं में कमी और पनडुब्बियों का पता लगाने वाले सेंसर में व्यवधान शामिल है।

यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।

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