नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान एक बड़ा साइबर हमला हुआ था। एक्सचेंज के सीईओ आशीष कुमार चौहान ने बताया कि इस दौरान हैकरों ने NSE की वेबसाइट को बंद करने के उद्देश्य से दस मिनट के भीतर “40 करोड़” बार निशाना बनाया। यह घटना उस समय हुई जब कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा सैन्य अभियान चलाया जा रहा था।
चौहान ने यह भी खुलासा किया कि एक्सचेंज पर औसतन हर दिन लगभग 20 करोड़ साइबर हमले होते हैं, और इन्हें सफलतापूर्वक विफल करने के लिए कड़े कदम उठाए गए हैं। उन्होंने इस स्थिति को “एक अनुचित खेल” बताया, जहां उन्हें “हर बार सही होना पड़ता है” जबकि “हमलावर को केवल एक बार सही होने की जरूरत होती है”।
यह साइबर हमला उस बड़ी साइबर युद्ध जैसी स्थिति का हिस्सा था, जो पहलगाम आतंकी हमले और उसके बाद हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान देखने को मिली। इस दौरान संदिग्ध पाकिस्तानी हैकरों ने सैन्य, रक्षा से संबंधित साइटों, स्टॉक एक्सचेंजों और निजी कंपनियों पर लाखों हमले करने की कोशिश की।
हालांकि, इन साइबर हमलों को बड़े पैमाने पर नाकाम कर दिया गया, लेकिन हैकरों को कुछ मामूली सफलता भी मिली। एक रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई, आर्मर्ड व्हीकल निगम लिमिटेड की वेबसाइट को हैक कर उस पर पाकिस्तानी झंडा और पाकिस्तानी सेना का अल खालिद टैंक प्रदर्शित किया गया था।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान साइबर हमला
NSE के सीईओ आशीष कुमार चौहान ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान हुए साइबर हमलों का विवरण देते हुए कहा, “दस मिनट में, हमारी वेबसाइटों को बंद करने के लिए हम पर 40 करोड़ हमले हुए।” यह सैन्य अभियान 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में 7 मई 2025 को भारत द्वारा शुरू किया गया था। यह चार दिवसीय संघर्ष 7 से 10 मई तक चला, जिसमें युद्धविराम पर सहमति से पहले कई चरणों में हमले हुए। इस तनावपूर्ण माहौल में हैकर “स्वाभाविक रूप से प्रेरित” थे, जिनका उद्देश्य भारत के महत्वपूर्ण डिजिटल बुनियादी ढांचे को बाधित करना था।
NSE पर रोजाना होते हैं 20 करोड़ साइबर हमले
चौहान ने बताया कि साइबर हमलों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा, “जाहिर है, हमारी संपत्ति की रक्षा करना हमारा काम है। तीन साल पहले, एक सामान्य दिन में, हम पर 3 करोड़ हमले होते थे। आज, मुझ पर 20 करोड़ हमले होते हैं।” उन्होंने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए कहा, “मुझे हर बार सफल होना है लेकिन उन्हें केवल एक बार सफल होना है। यह एक बहुत ही अनुचित खेल है लेकिन मैं इसी खेल में हूं। मैं रोता रह सकता हूं लेकिन मेरे पास एक काम है जिसे करना है।”
ट्रेडिंग पर कोई असर नहीं
सीईओ ने स्पष्ट किया कि NSE की वेबसाइट को सफलतापूर्वक हैक कर लेने की स्थिति में भी शेयर बाजार के कारोबार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने समझाया कि वेबसाइट और ट्रेडिंग सिस्टम दोनों अलग-अलग नेटवर्क पर काम करते हैं। इसका मतलब है कि वेबसाइट पर हमला होने से ट्रेडिंग गतिविधियों की सुरक्षा और संचालन प्रभावित नहीं होता है, जो निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय है।
साइबर सुरक्षा के लिए NSE के उपाय
NSE अपने सिस्टम को सुरक्षित रखने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। चौहान ने बताया, “हमने अपना निवेश बढ़ाया है, दुनिया भर से साइबर सुरक्षा पर सर्वोत्तम तकनीक प्राप्त करने की कोशिश की है, उनका परीक्षण किया है, उन्हें लागू किया है, और अपने स्वयं के एल्गोरिदम के माध्यम से जांच करते रहते हैं।” इसके अलावा, NSE अपनी सुरक्षा में किसी भी कमी का पता लगाने के लिए तीसरे पक्ष की कंपनियों और हैकरों को अपने सर्वर पर हमला करने के लिए भुगतान भी करता है, ताकि उन खामियों को दूर किया जा सके।
कैसे काम करते हैं आधुनिक साइबर हमलावर
चौहान ने बताया कि हमलावर अब रोबोटिक हो गए हैं और ‘पे फॉर यूज’ यानी ‘उपयोग के लिए भुगतान’ की अवधारणा पर काम करते हैं। उन्होंने उदाहरण दिया, “तो, आप उन्हें 10 डॉलर का भुगतान करें और वे आप पर एक करोड़ बार हमला करेंगे। आप उन्हें 20 डॉलर का भुगतान करें और वे दो बार हमला करेंगे, इत्यादि। AI के साथ, यह और भी बुरा होगा।” उन्होंने यह भी बताया कि हमले एक जगह से शुरू होते हैं, लेकिन “स्लेव्स” (स्पाइवेयर के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द) पहले दूसरे देशों में स्थित सर्वरों पर भेजे जाते हैं और फिर वहां से एक साथ हमला करने का संकेत दिया जाता है। इसलिए, यह पता लगाना मुश्किल होता है कि वास्तविक हमलावर कौन है।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने खुलासा किया कि एक बड़े सैन्य अभियान के दौरान उसे एक बड़े साइबर हमले का सामना करना पड़ा, लेकिन उसके मजबूत सुरक्षा उपायों ने इसे सफलतापूर्वक विफल कर दिया। यह घटना भारत के महत्वपूर्ण वित्तीय संस्थानों के लिए बढ़ते साइबर खतरों और उनसे निपटने के लिए निरंतर सतर्कता और तकनीकी उन्नयन की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
FAQs
NSE पर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कितना बड़ा साइबर हमला हुआ?
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की वेबसाइट पर दस मिनट के भीतर 40 करोड़ बार साइबर हमला किया गया था।
क्या इस हमले से NSE की ट्रेडिंग प्रभावित हुई?
नहीं, इस हमले से NSE की ट्रेडिंग प्रभावित नहीं हुई क्योंकि वेबसाइट और ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म दो अलग-अलग नेटवर्क पर काम करते हैं।
NSE पर औसतन कितने साइबर हमले होते हैं?
NSE के सीईओ के अनुसार, एक्सचेंज पर अब औसतन हर दिन लगभग 20 करोड़ साइबर हमले होते हैं, जो तीन साल पहले 3 करोड़ प्रतिदिन थे।
साइबर सुरक्षा के लिए NSE क्या कदम उठा रहा है?
NSE साइबर सुरक्षा में निवेश बढ़ा रहा है, दुनिया भर से बेहतरीन तकनीक का उपयोग कर रहा है, और अपनी सुरक्षा प्रणाली की खामियों का पता लगाने के लिए तीसरे पक्ष के हैकरों को भी काम पर रखता है।
ऑपरेशन सिंदूर क्या था?
ऑपरेशन सिंदूर 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत द्वारा 7 मई से 10 मई 2025 तक चलाया गया एक सैन्य अभियान था।
यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।


