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एनर्जी ट्रांजिशन लक्ष्यों के लिए भारत को सालाना 145 अरब डॉलर निवेश की जरूरत: रिपोर्ट

भारत के ऊर्जा क्षेत्र को देश के मजबूत आर्थिक विस्तार और महत्वाकांक्षी नेट-ज़ीरो लक्ष्यों के बीच के अंतर को पाटने के लिए सालाना लगभग 145 बिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाने होंगे। मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, इस निवेश को मुख्य रूप से बिजली उत्पादन, भंडारण और ग्रिड के तत्काल आधुनिकीकरण पर केंद्रित करने की आवश्यकता है।

ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधन डेटा एनालिटिक्स फर्म, वुड मैकेंज़ी की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत अपने ऊर्जा मिश्रण में विविधता लाने के लिए कोयला गैसीकरण पर बढ़ते जोर के साथ 2030 तक 1.5 बिलियन टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य हासिल करने की राह पर है। भारत ने 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है, और इस दिशा में ऊर्जा क्षेत्र का परिवर्तन महत्वपूर्ण है।

रिपोर्ट में यह भी पूर्वानुमान लगाया गया है कि देश में प्राकृतिक गैस की मांग 2024 में 72 बिलियन क्यूबिक मीटर से दोगुनी होकर 2050 तक 140 बिलियन क्यूबिक मीटर से अधिक हो जाएगी। इसमें उद्योग क्षेत्र की हिस्सेदारी 2030 तक दो-तिहाई से अधिक और 2050 तक 55 प्रतिशत से ऊपर रहेगी। रिपोर्ट ने भारत को चीनी सौर और बैटरी आपूर्ति श्रृंखला के एक विश्वसनीय और बड़े पैमाने के विकल्प के रूप में भी रेखांकित किया है।

वार्षिक निवेश की आवश्यकता

वुड मैकेंज़ी की रिपोर्ट के अनुसार, भारत को अपने ऊर्जा क्षेत्र में परिवर्तन के लिए भारी निवेश की जरूरत है। देश की अर्थव्यवस्था के तेजी से बढ़ने और 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन के लक्ष्य को देखते हुए, 2026 और 2035 के बीच लगभग 1.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश का अनुमान लगाया गया है। इसमें से सालाना लगभग 145 बिलियन डॉलर की आवश्यकता होगी। यह राशि मुख्य रूप से बिजली उत्पादन, ऊर्जा भंडारण प्रणालियों और सबसे महत्वपूर्ण, पावर ग्रिड के आधुनिकीकरण पर खर्च की जाएगी।

कोयला और प्राकृतिक गैस की भूमिका

रिपोर्ट में कहा गया है कि ऊर्जा परिवर्तन की गति तेज होने के बावजूद, निकट भविष्य की स्थिरता के लिए हाइड्रोकार्बन ईंधन मौलिक बने रहेंगे। भारत 2030 तक 1.5 बिलियन टन कोयला उत्पादन के अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सही रास्ते पर है। इसके साथ ही, ऊर्जा मिश्रण में विविधता लाने के लिए कोयला गैसीकरण पर भी जोर दिया जा रहा है। वहीं, प्राकृतिक गैस की मांग में भारी वृद्धि का अनुमान है, जो 2050 तक दोगुनी होकर 140 बिलियन क्यूबिक मीटर तक पहुंच सकती है, जिसमें औद्योगिक क्षेत्र सबसे बड़ा उपभोक्ता होगा।

आयात निर्भरता और घरेलू उत्पादन

फर्म ने अनुमान लगाया है कि 2035 तक कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता 87 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। इस चुनौती से निपटने के लिए, रिपोर्ट ने अपस्ट्रीम क्षेत्र को पुनर्जीवित करने और भारतीय अन्वेषण और उत्पादन (E&P) क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय तेल कंपनियों को आकर्षित करने का आग्रह किया है। घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सौर आपूर्ति श्रृंखला में भारत की क्षमता

रिपोर्ट ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत के पास चीनी सौर और बैटरी आपूर्ति श्रृंखला का एक विश्वसनीय विकल्प बनने की अनूठी क्षमता है। जैसे-जैसे वैश्विक बाजार अपनी खरीद में विविधता लाना चाहते हैं, भारत का परिपक्व होता विनिर्माण इकोसिस्टम एक विशिष्ट प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्रदान करता है। सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) जैसी योजनाओं ने इस क्षेत्र को बढ़ावा दिया है।

बाजार सुधार और विशेषज्ञों की राय

वुड मैकेंज़ी के एशिया प्रशांत के उपाध्यक्ष, जोशुआ न्गु ने कहा कि भारत को अपनी तात्कालिक ऊर्जा सुरक्षा को जोखिम से दूर करना चाहिए और साथ ही एक शीर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था का समर्थन करने के लिए आवश्यक निम्न-कार्बन ढांचे का निर्माण करना चाहिए। फर्म की उपाध्यक्ष, राशिका गुप्ता ने कहा कि सफलता बाजार सुधारों की गति पर निर्भर करती है, विशेष रूप से बिजली संशोधन विधेयक पर, जो वितरण प्रतिस्पर्धा में सुधार करेगा और ग्रिड आधुनिकीकरण के लिए निजी पूंजी को आकर्षित करने के लिए आवश्यक पारदर्शी निवेश संकेत प्रदान करेगा।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत के ऊर्जा क्षेत्र का भविष्य बड़े पैमाने पर निवेश, नीतिगत सुधारों और पारंपरिक व नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के बीच संतुलन स्थापित करने की क्षमता पर निर्भर करेगा। नेट-ज़ीरो लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए बिजली ग्रिड का आधुनिकीकरण और निजी पूंजी को आकर्षित करना सबसे महत्वपूर्ण कदम होंगे।

FAQs

भारत को ऊर्जा क्षेत्र में सालाना कितने निवेश की आवश्यकता है?

वुड मैकेंज़ी की रिपोर्ट के अनुसार, भारत को अपने ऊर्जा क्षेत्र में सालाना लगभग 145 बिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश की आवश्यकता है।

यह निवेश किन प्रमुख क्षेत्रों में किया जाना है?

यह निवेश मुख्य रूप से बिजली उत्पादन (power generation), ऊर्जा भंडारण (storage) और पावर ग्रिड के तत्काल आधुनिकीकरण (grid modernisation) पर केंद्रित होगा।

प्राकृतिक गैस की मांग को लेकर क्या पूर्वानुमान लगाया गया है?

रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि भारत में प्राकृतिक गैस की मांग 2024 में 72 बिलियन क्यूबिक मीटर से बढ़कर 2050 तक 140 बिलियन क्यूबिक मीटर से अधिक हो जाएगी।

क्या भारत चीन की सौर आपूर्ति श्रृंखला का विकल्प बन सकता है?

हाँ, रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के पास अपने परिपक्व विनिर्माण इकोसिस्टम के कारण चीनी सौर और बैटरी आपूर्ति श्रृंखला का एक विश्वसनीय और बड़े पैमाने का विकल्प बनने की अनूठी स्थिति है।

ऊर्जा क्षेत्र में सुधारों के लिए किस विधेयक को महत्वपूर्ण बताया गया है?

रिपोर्ट में बिजली संशोधन विधेयक (Electricity Amendment Bill) को महत्वपूर्ण बताया गया है, क्योंकि यह वितरण प्रतिस्पर्धा में सुधार और ग्रिड आधुनिकीकरण के लिए निजी निवेश को अनलॉक करने में मदद करेगा।

यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।

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