एयरोस्पेस दिग्गज एयरबस ने भारत से अपनी खरीद में एक महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज की है, जो 2019 में 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर से तीन गुना बढ़कर लगभग 1.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गई है। यह आंकड़ा भारत के एयरोस्पेस इकोसिस्टम में कंपनी के बढ़ते विश्वास और निवेश को दर्शाता है। एयरबस इंडिया और दक्षिण एशिया के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक, जर्गेन वेस्टरमेयर ने यह जानकारी दी।
कंपनी ने भारत को केवल एक बाजार के रूप में नहीं, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला चुनौतियों का सामना करने के लिए एक महत्वपूर्ण और विश्वसनीय रणनीतिक संसाधन केंद्र के रूप में स्थापित किया है। भारत की विशाल इंजीनियरिंग और आईटी प्रतिभा, जनसांख्यिकीय लाभ और राजनीतिक स्थिरता इसे एयरोस्पेस में व्यापार और निवेश के लिए एक आकर्षक स्थान बनाती है। एयरबस अपनी ‘मेक इन इंडिया’ रणनीति के तहत भारत में एक व्यापक एयरोस्पेस इकोसिस्टम विकसित करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
इस प्रतिबद्धता के हिस्से के रूप में, एयरबस ने भारतीय आपूर्तिकर्ताओं को टियर-1 का दर्जा देना शुरू कर दिया है और कई महत्वपूर्ण घटकों के निर्माण के लिए अनुबंध दिए हैं। कंपनी टाटा के साथ साझेदारी में भारत में दो फाइनल असेंबली लाइनें भी स्थापित कर रही है, जो देश के विनिर्माण कौशल के लिए एक बड़ा कदम है।
भारत से एयरबस की खरीद में भारी वृद्धि
एयरबस द्वारा भारत से की जाने वाली सोर्सिंग में पिछले पांच वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 2019 में यह आंकड़ा 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर था, जो अब बढ़कर लगभग 1.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया है। कंपनी का अनुमान है कि 2030 से काफी पहले यह खरीद 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच जाएगी। यह वृद्धि न केवल मात्रा में है, बल्कि गतिविधियों की जटिलता और मूल्य में भी है। कंपनी ने A320 और A220 विमानों के लिए दरवाजे, फ्लैप ट्रैक बीम और हेलीकॉप्टर फ्यूजलेज बनाने के लिए भारतीय आपूर्तिकर्ताओं को अनुबंध दिए हैं।
रणनीतिक केंद्र के रूप में भारत का उदय
एयरबस भारत को अब केवल एक बाजार के रूप में नहीं देखता, बल्कि इसे अपनी वैश्विक रणनीतियों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र मानता है। कंपनी के अनुसार, भारत अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता और क्षमता के कारण एक रणनीतिक संसाधन केंद्र के रूप में मजबूत हो रहा है। देश की राजनीतिक स्थिरता, नीतिगत पूर्वानुमेयता और विशाल टैलेंट पूल इसे वैश्विक वाणिज्यिक विमान और हेलीकॉप्टर कार्यक्रमों के लिए एक आदर्श स्थान बनाते हैं। एयरबस भारत के इस प्रतिभा लाभ का पूरी तरह से उपयोग कर रहा है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए भारतीय फर्मों को एकीकृत कर रहा है।
मेक इन इंडिया और स्थानीय उत्पादन
‘मेक इन इंडिया’ पहल एयरबस की भारतीय रणनीति के केंद्र में है। कंपनी विनिर्माण, असेंबली, रखरखाव, इंजीनियरिंग, डिजिटल, लीजिंग और प्रशिक्षण सहित सभी आयामों में एक मजबूत एयरोस्पेस इकोसिस्टम विकसित करना चाहती है। इस दिशा में एक बड़ा कदम टाटा के साथ साझेदारी में दो फाइनल असेंबली लाइनों की स्थापना है। इनमें से एक C295 सैन्य परिवहन विमान के लिए और दूसरी H125 हेलीकॉप्टरों के लिए होगी। इसके अलावा, कंपनी ने वडोदरा में गति शक्ति विश्वविद्यालय के साथ कौशल और प्रशिक्षण पहलों में भी निवेश किया है। अधिक जानकारी के लिए PaisaMag.com पर जाएं।
क्षेत्रीय संपर्क और उड़ान योजना
एयरबस सरकार की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना UDAN (उड़े देश का आम नागरिक) का समर्थन करने के लिए भी प्रतिबद्ध है। कंपनी अपने A220 विमान को इस कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी मानती है, जो टियर-2 और टियर-3 मार्गों को व्यावसायिक रूप से टिकाऊ और कुशल बना सकता है। विशेष रूप से, A220 विमान में ‘मेक इन इंडिया’ के तहत बेंगलुरु में निर्मित महत्वपूर्ण डोर असेंबली जैसे घटक शामिल हैं, जो एक एकीकृत इकोसिस्टम बनाने की कंपनी की रणनीति को दर्शाता है।
एयरोस्पेस क्षेत्र के लिए सुझाव
भारत की क्षमता को अधिकतम करने के लिए, एयरबस ने चार क्षेत्रों पर ध्यान देने का सुझाव दिया है। पहला, एयरोस्पेस और रक्षा (A&D) को एक बुनियादी ढांचा उद्योग मानकर वित्तपोषण को पुनर्गठित करना, ताकि प्रतिस्पर्धी और दीर्घकालिक ऋण उपलब्ध हो सके। दूसरा, उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) जैसी योजनाओं का विस्तार करना। तीसरा, मानव पूंजी विकास में तेजी लाना ताकि स्थानीय उद्योग ‘बिल्ट-टू-प्रिंट’ से आगे बढ़कर ‘बिल्ट-टू-डिजाइन’ जैसी उच्च-मूल्य वाली दक्षताओं की ओर बढ़ सके। अंत में, वैश्विक मूल उपकरण निर्माताओं (OEMs) का समर्थन महत्वपूर्ण है।
विंग्स इंडिया 2026 में एयरबस की भागीदारी
आगामी विंग्स इंडिया 2026 एयरशो में, एयरबस अपने वाणिज्यिक विमानों और हेलीकॉप्टरों के व्यापक पोर्टफोलियो का प्रदर्शन करेगा। इसमें A220, A321LR वाणिज्यिक विमान, और H125 व H160 हेलीकॉप्टर शामिल होंगे। प्रदर्शनी में A321XLR और A220-300 के स्केल मॉडल के साथ-साथ H145 और H125 हेलीकॉप्टर के मॉडल भी प्रदर्शित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, कंपनी अपने बूथ पर एक H125 वर्चुअल रियलिटी सिम्युलेटर भी लगाएगी और टिकाऊ विमानन को आगे बढ़ाने के अपने प्रयासों को उजागर करेगी।
एयरबस की भारत से सोर्सिंग में उल्लेखनीय वृद्धि और ‘मेक इन इंडिया’ के तहत विनिर्माण इकाइयों की स्थापना देश के एयरोस्पेस क्षेत्र में एक नए अध्याय का प्रतीक है। यह कदम न केवल भारतीय आपूर्तिकर्ताओं के लिए अवसर पैदा करता है, बल्कि भारत को वैश्विक एयरोस्पेस विनिर्माण और प्रतिभा केंद्र के रूप में भी स्थापित करता है।
FAQs
2019 से अब तक भारत से एयरबस की खरीद कितनी बढ़ी है?
2019 से अब तक भारत से एयरबस की खरीद तीन गुना बढ़ी है। यह 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर लगभग 1.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गई है।
एयरबस भारत में कौन सी दो असेंबली लाइनें स्थापित कर रही है?
एयरबस टाटा के साथ मिलकर भारत में दो फाइनल असेंबली लाइनें स्थापित कर रही है: एक C295 सैन्य परिवहन विमान के लिए और दूसरी H125 हेलीकॉप्टरों के लिए।
एयरबस उड़ान योजना के लिए किस विमान का प्रस्ताव दे रही है?
एयरबस भारत सरकार की UDAN (उड़े देश का आम नागरिक) योजना के लिए अपने A220 विमान का प्रस्ताव दे रही है ताकि टियर-2 और टियर-3 शहरों के बीच कनेक्टिविटी को और बेहतर बनाया जा सके।
‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारत में एयरबस के कौन से हिस्से बनाए जा रहे हैं?
‘मेक इन इंडिया’ के तहत, भारतीय आपूर्तिकर्ता एयरबस के लिए A320 और A220 विमानों के दरवाजे, फ्लैप ट्रैक बीम और हेलीकॉप्टर फ्यूजलेज जैसे महत्वपूर्ण घटकों का निर्माण कर रहे हैं।
भारत के एयरोस्पेस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए एयरबस ने क्या सुझाव दिए हैं?
एयरबस ने चार प्रमुख क्षेत्रों में सुधार का सुझाव दिया है: वित्तपोषण का पुनर्गठन, पीएलआई जैसी योजनाओं का विस्तार, मानव पूंजी का विकास, और वैश्विक कंपनियों के साथ भारतीय फर्मों का गहरा एकीकरण।
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