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एआई का 90 के दशक जैसा दौर, इस बार मौका न चूके भारत

आगामी केंद्रीय बजट से पहले, विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया है कि भारत को प्रौद्योगिकी में मिला दूसरा मौका नहीं गंवाना चाहिए। यह विचार एक बजट-पूर्व गोलमेज चर्चा के दौरान सामने आया, जिसमें वैश्विक अनिश्चितताओं और तीव्र तकनीकी बदलावों के बीच भारत की रणनीति पर विचार-विमर्श किया गया। चर्चा का मुख्य बिंदु यह था कि भारत को केवल एक उपभोक्ता बाजार बने रहने के बजाय, उत्पादों का निर्माता और निर्माता राष्ट्र बनना होगा।

विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में, भारत आज उसी मोड़ पर खड़ा है जहाँ वह 1990 के दशक के अंत में था। उस समय देश आईटी सेवाओं का एक वैश्विक केंद्र तो बन गया, लेकिन विश्व-स्तरीय प्रौद्योगिकी उत्पाद बनाने में असफल रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि AI ने उस ऐतिहासिक असंतुलन को ठीक करने का एक दुर्लभ अवसर प्रदान किया है। भारत को अब AI सेवाओं के साथ-साथ AI उत्पादों के निर्माण में भी एक वैश्विक नेता बनने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

इस चर्चा में डेलॉइट के भागीदार सलोनी रॉय, सुमीत हेमकर, अनुजेश द्विवेदी, एस अंजनी कुमार और एंटनी प्रशांत शामिल हुए। इन सभी ने विभिन्न क्षेत्रों पर अपने विचार रखे और इस बात पर सहमति जताई कि आगामी बजट का ध्यान अल्पकालिक लाभ के बजाय दीर्घकालिक क्षमताओं के निर्माण पर होना चाहिए। इसमें नीतिगत निश्चितता, नवीन युग के बुनियादी ढांचे में निवेश और सेवाओं से नवाचार की ओर एक रणनीतिक बदलाव शामिल है।

बजट पूर्व चर्चा और विशेषज्ञों की राय

फोर्ब्स इंडिया द्वारा आयोजित एक बजट-पूर्व गोलमेज चर्चा में, डेलॉइट के विशेषज्ञों ने आगामी केंद्रीय बजट के लिए प्रमुख प्राथमिकताओं पर अपने विचार साझा किए। इस चर्चा में इस बात पर व्यापक सहमति थी कि भारत को अब केवल सेवाओं और उपभोग पर निर्भर रहने के बजाय उत्पादों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, प्रौद्योगिकी में राष्ट्रों को दूसरा मौका बहुत कम मिलता है, और AI के रूप में भारत के पास अभी एक ऐसा ही अवसर है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: दूसरा मौका जिसे गंवाना नहीं चाहिए

डेलॉइट के पार्टनर एस अंजनी कुमार ने 1990 के दशक के आईटी बूम से तुलना करते हुए कहा कि उस समय भारत ने आईटी सेवाओं और बीपीओ क्षेत्र में मिली बढ़त का भरपूर फायदा उठाया, जिससे यह आज 200 बिलियन डॉलर से अधिक का उद्योग बन गया है। हालांकि, देश प्रौद्योगिकी उत्पाद बनाने की दौड़ में पीछे रह गया। उन्होंने कहा कि AI के साथ आज वैसी ही स्थिति है, जहाँ AI सेवाएँ और उत्पाद दोनों मौजूद हैं। एलेक्सा, चैटजीपीटी और जेमिनी जैसे उदाहरण AI उत्पादों के हैं। भारत को AI सेवाओं के साथ-साथ उत्पादों में भी विश्व नेता बनने का यह अवसर नहीं चूकना चाहिए।

AI इकोसिस्टम और बुनियादी ढांचे की चुनौतियां

कुमार ने AI इकोसिस्टम को दो भागों में बांटा। पहला हिस्सा “दीवारों के भीतर” का है, जिसमें सेमीकंडक्टर, जीपीयू, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और लार्ज लैंग्वेज मॉडल जैसे मुख्य तत्व शामिल हैं। दूसरा हिस्सा “दीवारों के बाहर” का है, जिसमें बिजली, पानी, ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर और कूलिंग जैसी सहायक आवश्यकताएं शामिल हैं। उन्होंने बताया कि भारत का नीतिगत ध्यान अब तक पहले हिस्से पर रहा है, जिसमें 10,000 करोड़ रुपये का इंडियाएआई मिशन भी शामिल है। हालांकि, जब तक बिजली की उपलब्धता, नवीकरणीय ऊर्जा और पानी के उपयोग जैसे मुद्दों का समाधान नहीं किया जाता, तब तक AI में निवेश बाधित रहेगा, क्योंकि डेटा सेंटर अत्यधिक ऊर्जा और संसाधन-गहन होते हैं।

घरेलू जरूरतों के लिए AI मॉडल पर जोर

कुमार ने यह भी तर्क दिया कि भारत को खरबों पैरामीटर वाले वैश्विक मॉडलों के साथ सीधे प्रतिस्पर्धा करने के बजाय कृषि, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और शासन जैसे क्षेत्रों के लिए छोटे और विशेष भाषा मॉडल बनाने को प्राथमिकता देनी चाहिए। इस दृष्टिकोण से लागत कम होगी, कम गणना क्षमता की आवश्यकता होगी और यह घरेलू जरूरतों के साथ बेहतर ढंग से मेल खाएगा। उन्होंने कहा कि AI सेवाओं का विकास तो होता रहेगा, लेकिन दीर्घकालिक मूल्य उन्हीं देशों को मिलेगा जो AI उत्पाद बनाएंगे।

आर्थिक सुधार और नीतिगत स्थिरता की मांग

चर्चा में शामिल डेलॉइट की पार्टनर सलोनी रॉय ने कहा कि हाल के सुधारों से पता चलता है कि सरकार उद्योग की चिंताओं के प्रति उत्तरदायी है। उन्होंने जीएसटी व्यवस्था में सुधारों का उल्लेख किया, लेकिन यह भी कहा कि इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर अभी भी निर्माताओं के लिए लागत बढ़ाते हैं। उन्होंने सीमा शुल्क को अगले बड़े सुधार के अवसर के रूप में पहचाना। पैनल के सदस्यों ने इस बात पर जोर दिया कि अब केवल प्रोत्साहनों के बजाय नीतिगत निश्चितता की अधिक आवश्यकता है, क्योंकि बार-बार होने वाले संशोधनों और नियामक अस्पष्टता ने दीर्घकालिक निवेश को हतोत्साहित किया है।

कर कानूनों का सरलीकरण

सुमीत हेमकर ने 1961 के कानून की जगह लेने वाले नए आयकर कानून 2025 को एक बड़ा और साहसिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य कानून को सरल बनाना और अनावश्यक प्रावधानों को हटाना है। इससे संदर्भ सरल होंगे और उम्मीद है कि व्याख्या भी सरल होगी, जिससे एक औसत करदाता के लिए माहौल आसान हो जाएगा।

ऊर्जा और विनिर्माण क्षेत्र की स्थिति

अनुजेश द्विवेदी ने भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से विस्तार पर प्रकाश डाला, जिसमें कैलेंडर वर्ष 2025 में लगभग 50 गीगावाट सौर क्षमता जोड़ी गई। हालांकि, उन्होंने ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर और उच्च-वोल्टेज उपकरणों के निर्माण में बाधाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों और बैटरी भंडारण के लिए महत्वपूर्ण खनिजों तक पहुंच एक रणनीतिक चुनौती बनी हुई है, और बजट में इन खनिजों की घरेलू खोज और पुनर्चक्रण पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है।

फार्मा सेक्टर का लक्ष्य और चुनौतियां

एंटनी प्रशांत के अनुसार, भारतीय फार्मा उद्योग को 2030 तक 60 बिलियन डॉलर से 130 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने के लिए जेनेरिक दवाओं से हटकर उच्च-मूल्य वाले बायोसिमिलर और जटिल फॉर्मूलेशन पर ध्यान केंद्रित करना होगा। इसके लिए अनुसंधान एवं विकास (R&D) पर खर्च बढ़ाना, विनियामक अनुमोदनों में तेजी लाना और विनिर्माण दक्षता में सुधार के लिए AI का उपयोग करना महत्वपूर्ण होगा।

गोलमेज चर्चा का समापन इस आम सहमति के साथ हुआ कि आगामी बजट की पहचान बड़े कर कटौती या लोकलुभावन घोषणाओं से नहीं होगी। इसके बजाय, इसका महत्व इस बात से आंका जाएगा कि क्या यह एक अनुमानित नीति, नई पीढ़ी के बुनियादी ढांचे में निरंतर निवेश, और उपभोग और सेवाओं से नवाचार और मूल्य निर्माण की ओर बदलाव के लिए प्रतिबद्धता का संकेत देता है।

FAQs

विशेषज्ञों के अनुसार भारत ने 1990 के दशक में कौन-सा अवसर गंवा दिया था?

विशेषज्ञों के अनुसार, 1990 के दशक में भारत आईटी सेवाओं का एक वैश्विक केंद्र बनने के बावजूद, विश्व स्तर पर सफल प्रौद्योगिकी उत्पादों का निर्माण करने का अवसर गंवा बैठा था।

AI इकोसिस्टम के लिए किन दो प्रमुख हिस्सों पर ध्यान देने की बात की गई?

चर्चा में AI इकोसिस्टम के दो हिस्सों पर ध्यान केंद्रित करने की बात की गई: पहला, “दीवारों के भीतर” के तत्व जैसे सेमीकंडक्टर और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, और दूसरा, “दीवारों के बाहर” की सहायक आवश्यकताएं जैसे बिजली, पानी और ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर।

आगामी बजट से उद्योग जगत की प्रमुख अपेक्षा क्या है?

उद्योग जगत की प्रमुख अपेक्षा केवल प्रोत्साहन या छूट नहीं, बल्कि नीतिगत निश्चितता और एक स्थिर नियामक वातावरण है ताकि दीर्घकालिक निवेश को बढ़ावा मिल सके।

नए आयकर कानून 2025 का मुख्य उद्देश्य क्या है?

नए आयकर कानून 2025 का मुख्य उद्देश्य मौजूदा 1961 के कानून को सरल बनाना, अनावश्यक प्रावधानों को हटाना और इसे औसत करदाताओं के लिए अधिक सुगम बनाना है।

फार्मा सेक्टर के लिए 2030 तक क्या लक्ष्य रखा गया है?

भारतीय फार्मा सेक्टर के लिए 2030 तक उद्योग को मौजूदा 60 बिलियन डॉलर से बढ़ाकर 130 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।

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