ईरान पर संभावित अमेरिकी सैन्य हमले के खतरे के बीच, ईरानी अधिकारियों ने मध्य पूर्व के अन्य देशों के साथ संपर्क साधा है। यह कूटनीतिक हलचल ईरान में एक महीने पहले शुरू हुए राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों और उसके बाद हुई हिंसक कार्रवाई की पृष्ठभूमि में हो रही है। इन प्रदर्शनों पर सरकार की कार्रवाई में हजारों लोगों के मारे जाने की खबर है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
अमेरिका ने इस क्षेत्र में अपने युद्धपोत यूएसएस अब्राहम लिंकन और कई मिसाइल विध्वंसक तैनात किए हैं, जो समुद्र से हमले शुरू करने में सक्षम हैं। हालांकि, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे दो प्रमुख क्षेत्रीय देशों ने संकेत दिया है कि वे ईरान के खिलाफ किसी भी हमले के लिए अपने हवाई क्षेत्र का उपयोग करने की अनुमति नहीं देंगे।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के लिए दो सीमाएं तय की हैं – शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या और हिरासत में लिए गए लोगों को सामूहिक रूप से फांसी देना। उन्होंने ईरान को बातचीत की मेज पर आने और परमाणु हथियारों के बिना एक निष्पक्ष समझौते पर पहुंचने की भी सलाह दी है, साथ ही चेतावनी दी है कि अगला हमला कहीं ज्यादा बुरा होगा। इस बीच, ईरान के अंदर इंटरनेट पर व्यापक प्रतिबंध जारी है और सरकार प्रदर्शनकारियों को “आतंकवादी” बता रही है।
ईरान के राजनयिक प्रयास और पड़ोसी देशों की प्रतिक्रिया
तनाव कम करने के प्रयासों के तहत, ईरानी अधिकारियों ने कई अरब देशों के साथ तेजी से बातचीत की है। मिस्र के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि उसके शीर्ष राजनयिक ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अमेरिकी मध्य पूर्व दूत स्टीव विटकॉफ दोनों से बात की ताकि क्षेत्र को अस्थिरता के नए चक्र में जाने से रोका जा सके।
इसी क्रम में, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के साथ फोन पर बात की। उन्होंने आश्वासन दिया कि सऊदी अरब “ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए अपने हवाई क्षेत्र या क्षेत्र का उपयोग करने की अनुमति नहीं देगा।” संयुक्त अरब अमीरात ने भी पहले इसी तरह का वादा किया था। ये दोनों देश अमेरिकी सैनिकों और हवाई संपत्ति की मेजबानी करते हैं, जो इस क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और एक शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी ने कतर के प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी के साथ भी बातचीत की। कतर अमेरिका के सबसे बड़े सैन्य अड्डे, अल उदीद एयर बेस की मेजबानी करता है, जो अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड का मुख्यालय है। अराघची ने कहा कि सैन्य खतरों के माध्यम से कूटनीति प्रभावी नहीं हो सकती और बातचीत बराबरी के स्तर पर और आपसी सम्मान के आधार पर होनी चाहिए।
विरोध प्रदर्शनों में हताहतों की संख्या पर नए आंकड़े
ईरान में सरकार द्वारा की गई हिंसक कार्रवाई के हफ्तों बाद, कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शनों में हुए नुकसान का एक नया और चौंकाने वाला आंकड़ा जारी किया है। अमेरिका स्थित मानवाधिकार कार्यकर्ता समाचार एजेंसी के अनुसार, इन प्रदर्शनों में कम से कम 6,221 लोग मारे गए हैं। इस आंकड़े में 5,858 प्रदर्शनकारी, 214 सरकारी बलों के सदस्य, 100 बच्चे और 49 आम नागरिक शामिल हैं जो प्रदर्शन नहीं कर रहे थे। एजेंसी ने 42,300 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी का भी दावा किया है।
इसके विपरीत, ईरान की सरकार ने मरने वालों की संख्या बहुत कम, 3,117 बताई है, जिसमें 2,427 नागरिक और सुरक्षा बल शामिल हैं, और बाकी को “आतंकवादी” करार दिया है। ईरान में इंटरनेट और संचार पर व्यापक प्रतिबंधों के कारण इन आंकड़ों का स्वतंत्र रूप से सत्यापन करना मुश्किल है। ये विरोध प्रदर्शन 28 दिसंबर को ईरानी मुद्रा रियाल के अवमूल्यन के कारण शुरू हुए थे और जल्द ही पूरे देश में फैल गए।
अमेरिकी सैन्य रुख और चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक बल प्रयोग करने के बारे में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। हालांकि, उन्होंने साफ कर दिया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या और कैदियों की सामूहिक फांसी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अमेरिका ने यूएसएस अब्राहम लिंकन विमानवाहक पोत और कई गाइडेड मिसाइल विध्वंसकों को इस क्षेत्र में भेजकर अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने एक संदेश में लिखा, “उम्मीद है कि ईरान जल्द ही ‘बातचीत की मेज पर आएगा’ और एक निष्पक्ष व न्यायसंगत सौदे पर बातचीत करेगा – कोई परमाणु हथियार नहीं।” उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि समय समाप्त हो रहा है और जून में हुए हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि “अगला हमला कहीं ज्यादा बुरा होगा!” इस बीच, ईरान ने इजरायल के लिए जासूसी करने के दोषी पाए गए हामिदरेजा साबेद नाम के एक व्यक्ति को फांसी देने की भी घोषणा की है।
ईरान में मौजूदा हालात बेहद तनावपूर्ण हैं। एक तरफ देश के अंदर हिंसक कार्रवाई और इंटरनेट ब्लैकआउट के कारण चिंता और अनिश्चितता का माहौल है, तो दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सैन्य टकराव का खतरा मंडरा रहा है। ईरान अपने पड़ोसी देशों के साथ कूटनीतिक बातचीत के जरिए इस संकट को टालने की कोशिश कर रहा है, जबकि अमेरिका अपनी सैन्य ताकत और चेतावनियों के जरिए दबाव बनाए हुए है।
FAQs
ईरान में हालिया विरोध प्रदर्शन क्यों शुरू हुए?
ये विरोध प्रदर्शन 28 दिसंबर को ईरानी मुद्रा, रियाल के मूल्य में भारी गिरावट के कारण शुरू हुए थे। आर्थिक संकट से शुरू हुआ यह आंदोलन जल्द ही देशव्यापी सरकार विरोधी प्रदर्शनों में बदल गया।
अमेरिका ने इस क्षेत्र में क्या सैन्य कार्रवाई की है?
अमेरिका ने यूएसएस अब्राहम लिंकन विमानवाहक पोत और कई गाइडेड मिसाइल विध्वंसकों को इस क्षेत्र में तैनात किया है। यह कदम ईरान पर सैन्य दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
ईरान पर हमले को लेकर सऊदी अरब और यूएई का क्या रुख है?
सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) दोनों ने स्पष्ट किया है कि वे ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य हमले के लिए अपने हवाई क्षेत्र या क्षेत्र के उपयोग की अनुमति नहीं देंगे।
कार्यकर्ताओं के अनुसार विरोध प्रदर्शनों में कितने लोग मारे गए?
अमेरिका स्थित मानवाधिकार कार्यकर्ता समाचार एजेंसी के अनुसार, विरोध प्रदर्शनों और उसके बाद हुई सरकारी कार्रवाई में कम से कम 6,221 लोग मारे गए हैं और 42,300 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान को क्या चेतावनी दी है?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर वह शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को मारता है या कैदियों को सामूहिक फांसी देता है तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने यह भी कहा है कि अगला हमला पहले से “कहीं ज्यादा बुरा” होगा।
यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।


