ईरान-अमेरिका तनाव एक बार फिर गहरा गया है क्योंकि दोनों देशों के बीच बयानबाजी और सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने शनिवार को देश में हुए हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान तनाव भड़काने और लोगों को “उकसाने” के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और यूरोप को दोषी ठहराया। यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के उस बयान के एक दिन बाद आई है जिसमें उन्होंने विश्वास जताया था कि ईरान सैन्य कार्रवाई का सामना करने के बजाय अमेरिका के साथ समझौता करना पसंद करेगा।
व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से बात करते हुए, ट्रम्प ने कहा, “मैं यह कह सकता हूं, वे एक समझौता करना चाहते हैं।” इसके साथ ही उन्होंने यह भी खुलासा किया कि अमेरिका ने ईरान की ओर एक “विशाल जहाजी बेड़ा” भेजा है और ईरान को उसके परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम पर बातचीत शुरू करने के लिए एक समय सीमा दी है, हालांकि उन्होंने समय सीमा का उल्लेख नहीं किया। इसके जवाब में ईरान ने स्पष्ट किया है कि उसकी मिसाइल और रक्षा क्षमताएं “कभी भी” बातचीत की मेज पर नहीं आएंगी।
इस बीच, क्षेत्र में सैन्य तैनाती भी बढ़ गई है। अमेरिका ने मध्य पूर्व में एक विमानवाहक पोत स्ट्राइक ग्रुप भेजा है और इज़राइल और सऊदी अरब के साथ अरबों डॉलर के हथियारों के सौदों को मंजूरी दी है। ईरान ने भी अपनी ओर से कहा है कि वह बातचीत और युद्ध दोनों के लिए समान रूप से तैयार है, जिससे मध्य पूर्व में स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई है। दुनिया भर के देश, विशेष रूप से मध्य पूर्व के अमेरिकी सहयोगी, दोनों पक्षों से संयम बरतने का आग्रह कर रहे हैं।
ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिका और इज़राइल पर लगाया आरोप
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने शनिवार को एक बयान में देश के आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हाल के विरोध प्रदर्शनों के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और यूरोपीय देशों ने तनाव को हवा दी और लोगों को इस्लामिक शासन के खिलाफ भड़काने का काम किया। यह बयान ईरान में आर्थिक समस्याओं को लेकर शुरू हुए राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में आया है, जो बाद में सरकार विरोधी प्रदर्शनों में बदल गए।
अमेरिका ने ईरान की ओर भेजा ‘विशाल जहाजी बेड़ा’
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान पर दबाव बढ़ाते हुए कहा कि एक “विशाल जहाजी बेड़ा” ईरान की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह बेड़ा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के लिए भेजे गए बेड़े से भी बड़ा है। ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने ईरान को उसके परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों पर बातचीत शुरू करने के लिए एक समय सीमा दी है, लेकिन इसका विवरण नहीं दिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि ईरान एक नया परमाणु समझौता करेगा, जिसमें यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ईरान के पास कोई परमाणु हथियार न हो।
बातचीत और युद्ध, दोनों के लिए तैयार: ईरान
अमेरिका की धमकियों के जवाब में ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि उनका देश अमेरिका के साथ बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन यह “समान स्तर” पर होनी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान “युद्ध के लिए उतना ही तैयार है” जितना बातचीत के लिए। वहीं, ईरान की रक्षा परिषद के प्रमुख अली शामखानी ने कहा कि ईरान ने सिर्फ समुद्री लड़ाई से आगे “उन्नत परिदृश्यों” के लिए खुद को तैयार किया है। ईरान ने साफ कर दिया है कि उसकी रक्षा और मिसाइल क्षमताएं किसी भी बातचीत का हिस्सा नहीं होंगी।
मध्य पूर्व में सैन्य हलचल और हथियारों के सौदे
तनाव के बीच, अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य उपस्थिति काफी बढ़ा दी है। अमेरिका ने उत्तरी अरब सागर में लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को तैनात किया है, जिसमें यूएसएस अब्राहम लिंकन के साथ कई विध्वंसक और लड़ाकू जेट स्क्वाड्रन शामिल हैं। इसके अलावा, एक अमेरिकी नौसेना विध्वंसक इज़राइल के इलियट बंदरगाह पर भी पहुंचा है। इसी समय, वाशिंगटन ने सऊदी अरब के लिए 9 बिलियन डॉलर और इज़राइल के लिए 6.67 बिलियन डॉलर के बड़े हथियार सौदों को मंजूरी दी है, जिसमें पैट्रियट मिसाइलें और अपाचे हेलीकॉप्टर शामिल हैं।
अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं और कूटनीतिक प्रयास
इस बढ़ते तनाव पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने भी प्रतिक्रिया दी है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने कहा कि उनका देश सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकने के लिए काम कर रहा है। सऊदी अरब, तुर्की, ओमान और कतर सहित मध्य पूर्व में अमेरिका के कई सहयोगियों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने का आग्रह किया है। इस बीच, ईरान के सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारिजानी ने शुक्रवार को मॉस्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। रूस ने दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने की पेशकश की है।
आंतरिक विरोध प्रदर्शन और अमेरिकी प्रतिबंध
यह पूरा तनाव ईरान में चल रहे राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में हो रहा है। कार्यकर्ताओं का दावा है कि सरकार की कार्रवाई में कम से कम 6,540 लोग मारे गए हैं। एक ईरानी अधिकारी ने पुष्टि की है कि गिरफ्तार किए गए लोगों में 18 साल से कम उम्र के छात्र भी शामिल थे। इन विरोध प्रदर्शनों को बेरहमी से दबाने का आरोप लगाते हुए, ट्रम्प प्रशासन ने ईरान के आंतरिक मंत्री इस्कंदर मोमेनी पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। प्रशासन के अनुसार, मोमेनी ने उन कानून प्रवर्तन एजेंसियों की देखरेख की जो हजारों शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की मौत के लिए जिम्मेदार थीं।
कुल मिलाकर, अमेरिका और ईरान के बीच शब्दों का युद्ध और सैन्य शक्ति का प्रदर्शन अपने चरम पर है। जबकि अमेरिका ईरान पर एक नए परमाणु समझौते के लिए दबाव डाल रहा है, ईरान अपनी संप्रभुता और रक्षा क्षमताओं पर कोई समझौता करने को तैयार नहीं है। इस बीच, कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं, लेकिन क्षेत्र में बढ़ती सैन्य तैनाती एक बड़े संघर्ष की आशंका को बढ़ा रही है।
FAQs
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का मुख्य कारण क्या है?
तनाव का हालिया कारण ईरान में राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन और उन्हें दबाने के लिए की गई सरकारी कार्रवाई है। इसके अलावा, अमेरिका ईरान के साथ एक नया परमाणु समझौता करना चाहता है, जबकि ईरान अपनी मिसाइल और रक्षा क्षमताओं पर बातचीत से इनकार कर रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ईरान से क्या चाहते हैं?
राष्ट्रपति ट्रम्प ईरान के साथ एक नया, निष्पक्ष और न्यायसंगत परमाणु समझौता करना चाहते हैं, जिसके तहत ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं होगी। वह सैन्य बल का उपयोग किए बिना यह लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं।
ईरान ने बातचीत के लिए क्या शर्त रखी है?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के अनुसार, ईरान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन यह तभी होगी जब यह “समान स्तर” पर हो। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि ईरान की रक्षा और मिसाइल क्षमताएं कभी भी बातचीत का विषय नहीं होंगी।
अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य उपस्थिति कैसे बढ़ाई है?
अमेरिका ने उत्तरी अरब सागर में यूएसएस अब्राहम लिंकन के नेतृत्व में एक कैरियर स्ट्राइक ग्रुप तैनात किया है। इसके अलावा, क्षेत्र में कई विध्वंसक जहाज, निगरानी उड़ानें और सैन्य मालवाहक विमानों की गतिविधि भी बढ़ी है। एक अमेरिकी विध्वंसक जहाज इज़राइल के बंदरगाह पर भी पहुंचा है।
इस तनाव पर अन्य देशों की क्या प्रतिक्रिया है?
ब्रिटेन जैसे सहयोगी देश ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए अमेरिका के साथ काम कर रहे हैं। वहीं, सऊदी अरब, तुर्की और कतर जैसे मध्य पूर्वी देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने का आग्रह किया है। रूस ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की पेशकश की है।
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