भारत और यूरोपीय संघ के बीच चल रही मुक्त व्यापार वार्ता के तहत, भारत यूरोपीय संघ से आयातित कारों पर लगने वाले टैरिफ में भारी कटौती करने की तैयारी कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में 110 प्रतिशत तक के उच्च आयात शुल्क को घटाकर 40 प्रतिशत तक किया जा सकता है। इस कदम को भारत के विशाल ऑटोमोबाइल बाजार को खोलने की दिशा में अब तक का सबसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
यह निर्णय नई दिल्ली और ब्रुसेल्स के बीच एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसकी घोषणा जल्द ही हो सकती है। रिपोर्टों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने 27 देशों के यूरोपीय संघ से आने वाले वाहनों की एक सीमित संख्या पर करों में तत्काल कटौती के लिए सहमति व्यक्त की है। यह कटौती विशेष रूप से उन वाहनों पर लागू होगी जिनकी आयात कीमत 15,000 यूरो (लगभग $17,739) से अधिक है।
समय के साथ, इन शुल्कों को और घटाकर केवल 10 प्रतिशत तक लाने की योजना है, जिससे Volkswagen, Mercedes-Benz, और BMW जैसी प्रमुख यूरोपीय कार कंपनियों के लिए भारतीय बाजार में पहुंच आसान हो जाएगी। इस संभावित समझौते को इसमें शामिल लोगों द्वारा ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ का उपनाम दिया गया है, जो द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को एक नई दिशा देगा।
इस व्यापार समझौते से भारत को भी लाभ मिलने की उम्मीद है, विशेष रूप से कपड़ा और आभूषण जैसे क्षेत्रों में निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है। इन क्षेत्रों को संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है।
प्रस्तावित टैरिफ कटौती की मुख्य बातें
नई दिल्ली का प्रस्ताव सालाना लगभग 2,00,000 कम्बशन-इंजन कारों को लक्षित करता है, हालांकि यह कोटा अभी अंतिम नहीं है और इसमें बदलाव हो सकता है। प्रस्तावित योजना के तहत, 15,000 यूरो से अधिक कीमत वाली कारों पर आयात शुल्क तत्काल प्रभाव से 40 प्रतिशत तक कम कर दिया जाएगा। लंबी अवधि में इस शुल्क को घटाकर 10 प्रतिशत करने का लक्ष्य है। यह कदम भारत की ऑटोमोबाइल क्षेत्र में ऐतिहासिक रूप से संरक्षणवादी नीति से एक बड़े बदलाव का संकेत है।
व्यापार समझौते का महत्व और लाभ
यह समझौता भारत और यूरोपीय संघ के बीच एक व्यापक मुक्त व्यापार समझौते का हिस्सा है। बिक्री के हिसाब से अमेरिका और चीन के बाद भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार है। अब तक, भारत ने 70 प्रतिशत और 110 प्रतिशत के उच्च आयात शुल्क के साथ अपने घरेलू ऑटो उद्योग की रक्षा की है, जिसकी Tesla के Elon Musk सहित कई उद्योग जगत के नेताओं ने आलोचना की है। इस समझौते से भारत को कपड़ा और आभूषण जैसे क्षेत्रों में अपने निर्यात के लिए बेहतर बाजार पहुंच मिल सकती है।
यूरोपीय कार निर्माताओं पर प्रभाव
कम करों से यूरोपीय वाहन निर्माताओं को बहुत लाभ होने की उम्मीद है। Volkswagen, Renault, Stellantis, Mercedes-Benz, और BMW जैसे ब्रांड, जो पहले से ही भारत में कुछ मॉडलों का उत्पादन करते हैं, उच्च शुल्कों के कारण अब तक सीमित सफलता ही प्राप्त कर पाए हैं। घटे हुए शुल्क उन्हें अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर आयातित वाहन पेश करने में सक्षम बनाएंगे, जिससे वे स्थानीय विनिर्माण बढ़ाने से पहले विभिन्न मॉडलों के साथ बाजार का परीक्षण कर सकेंगे। वर्तमान में, भारत के 4.4 मिलियन यूनिट वार्षिक यात्री कार बाजार में यूरोपीय ब्रांडों की हिस्सेदारी 4 प्रतिशत से भी कम है।
इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के लिए विशेष प्रावधान
इस शुल्क कटौती में बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को पहले पांच वर्षों के लिए छूट दी गई है। यह कदम भारत के उभरते ईवी परिदृश्य में Mahindra & Mahindra और Tata Motors जैसे घरेलू दिग्गजों द्वारा किए जा रहे निवेश को बढ़ावा देने और संरक्षित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। इस पांच साल की अवधि के बाद ही इलेक्ट्रिक वाहनों को समान टैरिफ कटौती के लिए योग्य माना जाएगा।
भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार की वर्तमान स्थिति
वर्तमान में, भारतीय कार बाजार पर जापान की Suzuki Motor और स्वदेशी कंपनियों महिंद्रा और टाटा का दबदबा है, जो मिलकर दो-तिहाई हिस्से पर काबिज हैं। अनुमान है कि भारत का कार बाजार 2030 तक बढ़कर 60 लाख यूनिट प्रति वर्ष हो जाएगा, जिससे नए निवेश को बढ़ावा मिलेगा। यह टैरिफ कटौती न केवल वैश्विक व्यापार नेटवर्क में गहराई से एकीकृत होने की भारत की इच्छा का संकेत देती है, बल्कि यह ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत भारत की विनिर्माण महत्वाकांक्षाओं को भी मजबूत कर सकती है।
यह कदम भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापारिक संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत कर सकता है। इससे जहां एक ओर यूरोपीय कार कंपनियों को दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक में अपनी उपस्थिति बढ़ाने का अवसर मिलेगा, वहीं दूसरी ओर भारतीय उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे।
FAQs
यूरोपीय कारों पर भारत कितना आयात शुल्क कम कर सकता है?
सूत्रों के अनुसार, भारत यूरोपीय संघ से आयातित कारों पर लगने वाले 110 प्रतिशत तक के आयात शुल्क को घटाकर प्रारंभिक चरण में 40 प्रतिशत तक कर सकता है, जिसे बाद में 10 प्रतिशत तक लाया जाएगा।
यह टैरिफ कटौती किन कारों पर लागू होगी?
यह कटौती मुख्य रूप से उन आयातित कारों पर लागू होगी जिनकी कीमत 15,000 यूरो से अधिक है। यह एक सीमित वार्षिक कोटे के तहत किया जाएगा।
क्या इलेक्ट्रिक कारों पर भी यह छूट मिलेगी?
नहीं, बैटरी से चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को इस शुल्क कटौती से पहले पांच वर्षों के लिए बाहर रखा गया है, ताकि घरेलू ईवी उद्योग को बढ़ावा मिल सके।
इस समझौते से भारत को क्या लाभ हो सकता है?
इस समझौते के बदले में भारत को यूरोपीय बाजार में कपड़ा और आभूषण जैसे अपने प्रमुख निर्यात उत्पादों के लिए बेहतर पहुंच और कम टैरिफ का लाभ मिल सकता है।
वर्तमान में भारतीय कार बाजार में यूरोपीय कंपनियों की हिस्सेदारी कितनी है?
वर्तमान में भारत के कुल यात्री कार बाजार में यूरोपीय ब्रांडों की हिस्सेदारी 4 प्रतिशत से भी कम है, जिस पर मुख्य रूप से जापानी और भारतीय कंपनियों का प्रभुत्व है।
यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।


