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आर्थिक सर्वेक्षण: R&D पर GDP का सिर्फ 0.6% खर्च करता है भारत

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, अनुसंधान और विकास (R&D) पर भारत का सकल व्यय सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के लगभग 0.64 प्रतिशत पर स्थिर बना हुआ है। यह आंकड़ा अमेरिका, चीन और इज़राइल जैसी नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में काफी कम है, जहां यह खर्च जीडीपी का 2.5 से 5 प्रतिशत तक है।

सर्वेक्षण में यह स्पष्ट किया गया है कि भारत में R&D का अंतर प्रतिभा की कमी के कारण नहीं, बल्कि निजी क्षेत्र की न्यूनतम भागीदारी और शोध को व्यावसायिक उत्पादों में बदलने में विफलता के कारण है। देश शुरुआती चरण के शोध में उत्कृष्ट प्रदर्शन करता है, लेकिन एक औद्योगिक अर्थव्यवस्था के लिए बाजार में तैनाती के लिए तैयार उत्पादों की आवश्यकता होती है।

नवाचार के इसी महत्व को पहचानते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 2025 में 1 लाख करोड़ रुपये की अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) योजना को क्रियान्वित किया। यह कदम निजी क्षेत्र के नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। आर्थिक सर्वेक्षण में इस योजना के पूरक के रूप में ट्रांसलेशनल रिसर्च सेंटर (TRCs) स्थापित करने का भी प्रस्ताव है, ताकि स्टार्टअप्स और छोटे उद्योगों के लिए नई तकनीकों के परीक्षण और सत्यापन की लागत और जोखिम को कम किया जा सके।

अनुसंधान एवं विकास (R&D) पर खर्च की स्थिति

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, भारत अपने सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का केवल 0.64 प्रतिशत ही अनुसंधान और विकास पर खर्च कर रहा है। यह आंकड़ा नवाचार को प्राथमिकता देने वाले प्रमुख देशों जैसे अमेरिका, चीन और इज़राइल से बहुत कम है, जो अपनी जीडीपी का 2.5% से 5% तक इस क्षेत्र में निवेश करते हैं। सकल घरेलू उत्पाद किसी देश की सीमाओं के भीतर एक विशिष्ट समय अवधि के दौरान उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं के कुल मौद्रिक मूल्य को मापता है और यह देश के आर्थिक स्वास्थ्य का एक प्रमुख संकेतक है।

इनोवेशन में निजी क्षेत्र की कम भागीदारी

सर्वेक्षण के अनुसार, भारत में R&D की धीमी गति का कारण प्रतिभा की कमी नहीं है। असली चुनौती निजी क्षेत्र की बहुत कम भागीदारी और प्रयोगशाला में किए गए शोध को बाजार में बिकने वाले उत्पादों में बदलने में आने वाली कठिनाइयां हैं। भारत शुरुआती शोध (टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल 1-3) में तो अच्छा है, लेकिन प्रोटोटाइप बनाने, पायलट प्रोजेक्ट चलाने और उत्पाद को बाजार के लिए तैयार करने (लेवल 7-9) जैसे मध्यवर्ती चरणों में अक्सर पिछड़ जाता है, जिसे “वैली ऑफ डेथ” भी कहा जाता है।

सरकारी पहल और नई योजनाएं

इस अंतर को पाटने के लिए, सरकार ने निजी क्षेत्र को R&D में निवेश के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से नवंबर 2025 में 1 लाख करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) योजना शुरू की है। इसके अतिरिक्त, आर्थिक सर्वेक्षण ने ट्रांसलेशनल रिसर्च सेंटर (TRCs) स्थापित करने का सुझाव दिया है। ये केंद्र स्टार्टअप्स, MSMEs, उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों को प्रोटोटाइपिंग और पायलटिंग में मदद करेंगे, जिससे नई तकनीकों को विकसित करने का जोखिम और लागत कम होगी।

वैश्विक नवाचार सूचकांक और भारत की रैंकिंग

कम खर्च के बावजूद, भारत ने नवाचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। देश अब अकादमिक प्रकाशनों का दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक बन गया है, जो 2010 में सातवें स्थान पर था। इसके साथ ही, ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में भारत की रैंकिंग 2019 में 66वें स्थान से सुधरकर 38वें स्थान पर पहुंच गई है। बेंगलुरु, दिल्ली और मुंबई दुनिया के शीर्ष 50 सबसे नवाचार-गहन समूहों में शामिल हैं।

बौद्धिक संपदा में भारत की प्रगति

बौद्धिक संपदा (इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी) के क्षेत्र में भी भारत ने उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। 2024 में, भारत ट्रेडमार्क के मामले में विश्व स्तर पर चौथे, पेटेंट में छठे और औद्योगिक डिजाइन में सातवें स्थान पर रहा। वित्तीय वर्ष 2020 से 2025 तक, पेटेंट आवेदनों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई, ट्रेडमार्क पंजीकरण 1.5 गुना बढ़े और डिजाइन पंजीकरण में 2.5 गुना की वृद्धि हुई। यह रुझान ब्रांडिंग और प्रक्रिया नवाचार की ओर बढ़ते ध्यान को दर्शाता है।

नवाचार के उभरते क्षेत्र

भारत में नवाचार की गतिविधियां अब बायोटेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल सेवाओं और सस्टेनेबिलिटी सॉल्यूशंस जैसे विविध क्षेत्रों में फैल रही हैं। इस विस्तार को बढ़ते जोखिम पूंजी, ऋण तक आसान पहुंच और स्टार्टअप्स के लिए इनक्यूबेटर-आधारित समर्थन से बल मिल रहा है। यह संकेत देता है कि देश की नवाचार प्रणाली अब केवल कुछ विशेष क्षेत्रों तक सीमित न रहकर एक व्यापक औद्योगिक आधार की ओर बढ़ रही है।

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने अनुसंधान एवं विकास पर भारत के कम खर्च और निजी क्षेत्र की अपर्याप्त भागीदारी को उजागर किया है। हालांकि, वैश्विक नवाचार रैंकिंग और बौद्धिक संपदा पंजीकरण में देश की प्रभावशाली प्रगति, सरकारी पहलों के साथ मिलकर, यह दर्शाती है कि भारत इस अंतर को पाटने और एक मजबूत नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में ठोस कदम उठा रहा है।

FAQs

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार भारत R&D पर कितना खर्च करता है?

आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, भारत अनुसंधान और विकास (R&D) पर अपने सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 0.64 प्रतिशत खर्च करता है।

भारत में R&D की मुख्य चुनौती क्या है?

भारत में R&D की मुख्य चुनौती प्रतिभा की कमी नहीं, बल्कि निजी क्षेत्र की न्यूनतम भागीदारी और शोध को सफलतापूर्वक व्यावसायिक उत्पादों में परिवर्तित करने में विफलता है।

सरकार ने निजी क्षेत्र के इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए कौन सी योजना शुरू की है?

सरकार ने निजी क्षेत्र के नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए नवंबर 2025 में 1 लाख करोड़ रुपये की अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) योजना शुरू की है।

ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में भारत की वर्तमान रैंक क्या है?

ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में भारत की रैंक 38वीं है, जो 2019 में 66वीं थी।

बौद्धिक संपदा के मामले में भारत की वैश्विक स्थिति क्या है?

2024 में, भारत ट्रेडमार्क में विश्व स्तर पर चौथे, पेटेंट में छठे और औद्योगिक डिजाइन के पंजीकरण में सातवें स्थान पर था।

यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।

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