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आर्थिक सर्वेक्षण: पीएलआई योजनाओं का मूल्यांकन

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, 2020 में लॉन्च होने के बाद से उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन (PLI) योजना ने 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक का वास्तविक निवेश आकर्षित किया है। यह योजना भारत के विनिर्माण क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई थी और इसके परिणाम अब सामने आने लगे हैं।

सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2025 तक इस योजना के माध्यम से 18.7 लाख करोड़ रुपये से अधिक का वृद्धिशील उत्पादन और बिक्री हुई है। इसके अलावा, योजना ने 12.6 लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा किए हैं। इस अवधि के दौरान कुल निर्यात 8.2 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा, जो वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है।

सरकार ने 12 क्षेत्रों में कुल 23,946 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन वितरित किए हैं, जबकि सभी 14 क्षेत्रों में कुल 806 आवेदनों को मंजूरी दी गई है। यह योजना प्रमुख क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देकर और बड़े पैमाने की अर्थव्यवस्थाओं को प्राप्त करके भारतीय निर्माताओं की क्षमता बढ़ाने पर केंद्रित है। इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों ने इस योजना के तहत विशेष रूप से प्रभावशाली प्रदर्शन किया है।

इस योजना की सफलता को देखते हुए सरकार ने इसके बजटीय आवंटन में भी वृद्धि की है। वित्त वर्ष 2024 की तुलना में वित्त वर्ष 2026 के लिए बजट लगभग दोगुना होकर करीब 8,900 करोड़ रुपये हो गया है, जो विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

आर्थिक सर्वेक्षण के प्रमुख आंकड़े

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में PLI योजना की उपलब्धियों का विस्तृत ब्यौरा दिया गया है। सितंबर 2025 तक, योजना के तहत 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हुआ है। इस निवेश से 18.7 लाख करोड़ रुपये से अधिक की वृद्धिशील बिक्री हुई और 8.2 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात संभव हुआ। योजना ने 12.6 लाख से अधिक लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित किए हैं। सरकार ने अब तक 12 क्षेत्रों में 23,946 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन बांटे हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में बड़ी सफलता

सेक्टर-वार प्रदर्शन को देखें तो इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र इस योजना की प्रमुख सफलता की कहानी के रूप में उभरा है। PLI योजना ने प्रमुख स्मार्टफोन कंपनियों को भारत में उत्पादन स्थानांतरित करने के लिए प्रोत्साहित किया है, जिससे देश एक प्रमुख मोबाइल फोन निर्माण और असेंबली हब में बदल गया है। पिछले दशक में मोबाइल फोन का उत्पादन दस गुना बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 5.5 लाख करोड़ रुपये हो गया है। हालांकि, सेमीकंडक्टर चिप के आयात पर महत्वपूर्ण निर्भरता बनी हुई है। 2024-25 में सेमीकंडक्टर चिप का आयात 24.7 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जो कुल इलेक्ट्रॉनिक्स आयात का 67 प्रतिशत है।

फार्मास्यूटिकल्स और ऑटोमोबाइल क्षेत्र का प्रदर्शन

इलेक्ट्रॉनिक्स के अलावा, फार्मास्यूटिकल क्षेत्र ने भी PLI के तहत मजबूत प्रदर्शन दिखाया है। योजना के पहले तीन वर्षों में बिक्री 2.6 लाख करोड़ रुपये को पार कर गई, जिसमें 1.7 लाख करोड़ रुपये का निर्यात भी शामिल है। मार्च 2025 तक इस क्षेत्र में समग्र घरेलू मूल्यवर्धन 83.7 प्रतिशत तक पहुंच गया। वहीं, ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स क्षेत्रों ने भी सितंबर 2025 तक 35,600 करोड़ रुपये से अधिक का संचयी निवेश आकर्षित किया है और लगभग 49,000 नौकरियां पैदा की हैं।

योजना का उद्देश्य और सरकारी प्रयास

PLI योजना को शुरुआत में 1.97 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ 14 प्रमुख क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने के लिए डिजाइन किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय निर्माताओं को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। मोबाइल फोन PLI की छह साल की मूल अवधि मार्च 2026 में समाप्त हो रही है। इस बीच, सरकार योजना से प्राप्त लाभ को बनाए रखने के लिए इसके विस्तार या ‘PLI 2.0’ जैसे किसी नए संस्करण पर विचार कर रही है।

सर्वेक्षण में यह भी उल्लेख किया गया है कि वित्त वर्ष 2026 में, लगातार वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, भारत के समग्र औद्योगिक क्षेत्र ने लचीलापन दिखाया और अपनी गति फिर से हासिल की। इसका एक बड़ा कारण उच्च-प्रौद्योगिकी विनिर्माण की ओर बदलाव रहा है।

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, PLI योजना ने अपने लॉन्च के बाद से निवेश, उत्पादन, निर्यात और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज की है। इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों ने इस योजना के तहत उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है, जिसने भारत को एक प्रमुख विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद की है।

FAQs

PLI योजना क्या है?

उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन (PLI) योजना भारत सरकार की एक पहल है, जिसका उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना और आयात बिल को कम करना है। इस योजना के तहत, सरकार भारत में निर्मित उत्पादों की वृद्धिशील बिक्री पर कंपनियों को प्रोत्साहन राशि प्रदान करती है।

आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार PLI योजना के तहत कुल कितना निवेश आया है?

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, PLI योजना ने अपनी शुरुआत से लेकर अब तक 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक का वास्तविक निवेश आकर्षित किया है।

इस योजना से कितने रोजगार पैदा हुए हैं?

सितंबर 2025 तक, PLI योजना ने 12.6 लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा किए हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स के अलावा कौन से क्षेत्र सफल रहे हैं?

इलेक्ट्रॉनिक्स के अलावा, फार्मास्यूटिकल्स और ऑटोमोबाइल क्षेत्रों ने भी प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। फार्मा क्षेत्र ने 2.6 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री दर्ज की, जबकि ऑटोमोबाइल क्षेत्र ने 35,600 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित किया।

सेमीकंडक्टर आयात को लेकर क्या स्थिति है?

योजना की सफलता के बावजूद, सेमीकंडक्टर चिप के आयात पर एक बड़ी निर्भरता बनी हुई है। 2024-25 में सेमीकंडक्टर चिप का आयात 24.7 बिलियन डॉलर था, जो देश के कुल इलेक्ट्रॉनिक्स आयात का 67 प्रतिशत है।

यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।

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