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आरआरबी का कारोबार 12 लाख करोड़ रुपये के पार, शुद्ध मुनाफा बढ़कर 7,720 करोड़ हुआ

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) का कुल कारोबार चालू वित्त वर्ष 2024-25 की पहली छमाही में 12 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया है। सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इन बैंकों का प्रदर्शन कई सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) के व्यापार स्तर को भी पार कर गया है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उनके बढ़ते महत्व को दर्शाता है।

वर्तमान में, देश भर में 28 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक कार्यरत हैं। ये बैंक 26 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 730 जिलों में अपनी 22,158 शाखाओं के माध्यम से बैंकिंग सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। इन बैंकों ने ग्रामीण भारत में वित्तीय सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इन बैंकों के प्रदर्शन में लगातार सुधार देखा जा रहा है। वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, बैंकों की संपत्ति की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है, क्योंकि उनके सकल गैर-निष्पादित संपत्ति (GNPA) और शुद्ध गैर-निष्पादित संपत्ति (NNPA) दोनों में गिरावट दर्ज की गई है। यह बैंकों के बेहतर प्रबंधन और ऋण वसूली को इंगित करता है।

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक सामूहिक रूप से 32.4 करोड़ जमा खातों और 3.2 करोड़ ऋण खातों का प्रबंधन करते हैं। ये आंकड़े ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं की गहरी पैठ को दर्शाते हैं। इसके अलावा, ये बैंक सरकार की वित्तीय समावेशन योजनाओं को आगे बढ़ाने में भी सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं।

कारोबार और वित्तीय प्रदर्शन

सरकारी बयान के अनुसार, 28 आरआरबी का कुल कारोबार 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। इन बैंकों का शुद्ध लाभ भी बढ़ा है। दिसंबर 2023 तक का अनंतिम शुद्ध लाभ 7,720 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जबकि वित्त वर्ष 2022-23 में समेकित शुद्ध लाभ 6,820 करोड़ रुपये था। इसके साथ ही, बैंकों की गैर-निष्पादित संपत्तियों में भी कमी आई है, जो एक सकारात्मक वित्तीय संकेत है।

क्या हैं क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक?

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, जिन्हें आरआरबी के नाम से जाना जाता है, भारत में विशेष ग्रामीण बैंक हैं। इनकी स्थापना आरआरबी अधिनियम, 1976 के तहत की गई थी। इनका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे और सीमांत किसानों, खेतिहर मजदूरों, कारीगरों और छोटे उद्यमियों को ऋण और अन्य बैंकिंग सुविधाएं प्रदान करना है। इनमें केंद्र सरकार की 50%, संबंधित राज्य सरकार की 15% और प्रायोजक बैंक की 35% हिस्सेदारी होती है।

वित्तीय समावेशन में भूमिका

आरआरबी वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वित्त मंत्रालय के अनुसार, इन बैंकों ने प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (Priority Sector Lending) के तहत निर्धारित सभी लक्ष्यों और उप-लक्ष्यों को प्राप्त करना जारी रखा है। चालू वित्त वर्ष के दौरान, इन बैंकों ने 45.68 लाख से अधिक नए प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) खाते खोले हैं, जिससे हाशिए पर मौजूद समाज के वर्गों तक बैंकिंग पहुंच सुनिश्चित हुई है।

भविष्य के लिए सरकारी दिशा-निर्देश

वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के सचिव एम. नागराजू ने सभी आरआरबी से अपने प्रदर्शन को बनाए रखने और भविष्य में और सुधार करने का आह्वान किया है। उन्होंने सुधार के लिए कुछ प्रमुख प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर जोर दिया, जिनमें ग्रामीण आबादी के बीच सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का कवरेज बढ़ाना, ऋण पोर्टफोलियो में विविधता लाना, आईटी बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, वित्तीय सेवाओं की डिजिटल डिलीवरी और ग्राहकों के लिए शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करना शामिल है। सचिव ने सभी आरआरबी, नाबार्ड और प्रायोजक बैंकों से आने वाली चुनौतियों की पहचान करने और उनसे प्रभावी ढंग से निपटने के लिए अपनी तैयारी को मजबूत करने का भी आग्रह किया।

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों ने चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में 12 लाख करोड़ रुपये का कुल कारोबार दर्ज कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। लाभप्रदता में वृद्धि और एनपीए में कमी के साथ, ये बैंक ग्रामीण भारत में वित्तीय स्थिरता और समावेशन को बढ़ावा देने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका को मजबूत कर रहे हैं।

FAQs

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) का कुल कारोबार कितना है?

चालू वित्त वर्ष 2024-25 की पहली छमाही में 28 आरआरबी का कुल कारोबार 12 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है।

भारत में कुल कितने आरआरबी कार्यरत हैं?

वर्तमान में, भारत में 28 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक 22,158 शाखाओं के माध्यम से काम कर रहे हैं जो 26 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में फैले हुए हैं।

आरआरबी का शुद्ध लाभ कितना रहा?

दिसंबर 2023 तक आरआरबी का अनंतिम शुद्ध लाभ 7,720 करोड़ रुपये था, जो पिछले वित्त वर्ष के 6,820 करोड़ रुपये के शुद्ध लाभ से अधिक है।

आरआरबी को सरकार ने क्या नए दिशा-निर्देश दिए हैं?

वित्तीय सेवा विभाग ने आरआरबी को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का कवरेज बढ़ाने, ऋण पोर्टफोलियो में विविधता लाने, आईटी और डिजिटल सेवाओं को मजबूत करने और ग्राहक शिकायत निवारण तंत्र में सुधार करने का निर्देश दिया है।

वित्तीय समावेशन में आरआरबी की क्या भूमिका है?

आरआरबी प्राथमिकता क्षेत्र को ऋण प्रदान करके और प्रधानमंत्री जन धन योजना जैसी योजनाओं को लागू करके वित्तीय समावेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने चालू वित्त वर्ष में 45.68 लाख से अधिक नए जन धन खाते खोले हैं।

यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।

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