अल्जाइमर रोग में स्मृति हानि के पीछे के एक संभावित तंत्र का वैज्ञानिकों ने खुलासा किया है। इस खोज के अनुसार, मस्तिष्क की कोशिकाएं यानी न्यूरॉन्स निष्क्रिय रूप से नष्ट नहीं होतीं, बल्कि वे स्वयं अपने सिनैप्स (तंत्रिका कनेक्शन) को खत्म कर देती हैं। यह प्रक्रिया एक ही रिसेप्टर द्वारा शुरू होती है जो एमिलॉयड बीटा और सूजन पैदा करने वाले अणुओं, दोनों के प्रति प्रतिक्रिया करता है।
यह खोज इस बात पर नई रोशनी डालती है कि अल्जाइमर रोग मस्तिष्क को कैसे नुकसान पहुंचाता है और इसका इलाज कैसे किया जाना चाहिए। शोधकर्ताओं का मानना है कि स्मृति हानि को रोकने के लिए एमिलॉयड प्लाक को तोड़ने पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, जैसा कि अधिकांश मौजूदा दवाएं करती हैं, सीधे सिनैप्टिक कनेक्शन को मिटने से बचाना अधिक प्रभावी हो सकता है।
यह अध्ययन स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के जीव विज्ञान और न्यूरोबायोलॉजी की प्रोफेसर कार्ला शैट्ज के नेतृत्व में एक टीम द्वारा किया गया है। इस खोज से अल्जाइमर से जुड़ी दो प्रमुख सिद्धांतों को एक ही आणविक तंत्र के माध्यम से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त हुआ है, जो भविष्य के उपचारों के लिए एक नई दिशा प्रदान कर सकता है।
स्मृति हानि का एक नया तंत्र
वैज्ञानिकों ने पाया है कि अल्जाइमर रोग में न्यूरॉन्स स्वयं अपने सिनैप्स, यानी तंत्रिका कोशिकाओं के बीच के महत्वपूर्ण कनेक्शन, को खत्म करने लगते हैं। इस प्रक्रिया को ‘सिनैप्स प्रूनिंग’ कहा जाता है। आमतौर पर यह प्रक्रिया मस्तिष्क के विकास के दौरान अनावश्यक कनेक्शनों को हटाने के लिए होती है, लेकिन वयस्क मस्तिष्क में यह धीमी हो जाती है। अल्जाइमर रोग में यह प्रक्रिया अनियंत्रित हो जाती है।
शोध में एक विशेष रिसेप्टर, LilrB2, की पहचान की गई है जो न्यूरॉन्स को सिनैप्स हटाने का संकेत देता है। जब एमिलॉयड बीटा या सूजन से संबंधित प्रोटीन इस रिसेप्टर से जुड़ते हैं, तो यह अत्यधिक सिनैप्स हानि को शुरू कर देता है, जिसके परिणामस्वरूप स्मृति कमजोर होने लगती है।
स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय का महत्वपूर्ण शोध
यह महत्वपूर्ण शोध स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय की प्रोफेसर कार्ला शैट्ज और उनकी टीम ने किया है। स्टैनफोर्ड के वू साई न्यूरोसाइंसेज इंस्टीट्यूट द्वारा रिपोर्ट किए गए इन निष्कर्षों को प्रतिष्ठित जर्नल PNAS में प्रकाशित किया गया है। टीम ने एक साझा रिसेप्टर (LilrB2) की पहचान की है जो एमिलॉयड बीटा और सूजन वाले प्रोटीन दोनों के लिए एक सामान्य लक्ष्य के रूप में कार्य करता है।
2013 में, शैट्ज की टीम ने दिखाया था कि एमिलॉयड बीटा सीधे LilrB2 से जुड़कर न्यूरॉन्स को अपने कनेक्शन खत्म करने के लिए प्रेरित करता है। नए अध्ययन ने इस संबंध को और गहरा किया है, जिसमें दिखाया गया है कि एक अन्य प्रोटीन C4d भी इसी रिसेप्टर से मजबूती से जुड़ता है।
एमिलॉयड बीटा और सूजन का साझा लक्ष्य
लंबे समय से अल्जाइमर रोग को एमिलॉयड बीटा प्लाक, टाऊ टेंगल्स और मस्तिष्क की सूजन से जोड़ा जाता रहा है। अब तक यह माना जाता था कि ये सभी कारक स्वतंत्र रूप से न्यूरॉन्स को नुकसान पहुंचाते हैं। लेकिन यह नया अध्ययन बताता है कि एमिलॉयड बीटा और सूजन से संबंधित प्रोटीन C4d, दोनों एक ही रिसेप्टर LilrB2 का उपयोग करके नुकसान पहुंचाते हैं।
C4d, जिसे पहले जैविक रूप से अप्रासंगिक माना जाता था, अब स्मृति हानि में सीधी भूमिका निभाता हुआ पाया गया है। यह एमिलॉयड बीटा की तरह ही LilrB2 रिसेप्टर को सक्रिय करता है, जो इस सिद्धांत को पुष्ट करता है कि दोनों विनाशकारी रास्ते एक ही सिग्नलिंग मार्ग का उपयोग करते हैं।
चूहों पर किए गए प्रयोग के परिणाम
इस सिद्धांत का परीक्षण करने के लिए, वैज्ञानिकों ने स्वस्थ चूहों के दिमाग में C4d प्रोटीन इंजेक्ट किया। इसके परिणाम चौंकाने वाले थे; न्यूरॉन्स से सिनैप्स तेजी से खत्म होने लगे, ठीक उसी तरह जैसे अल्जाइमर में देखा जाता है। यह एक सक्रिय प्रक्रिया थी जिसे न्यूरॉन्स ने LilrB2 रिसेप्टर के माध्यम से मिले संकेतों के जवाब में स्वयं शुरू किया था।
एक अन्य प्रयोग में, आनुवंशिक रूप से संशोधित चूहों का उपयोग किया गया जिनमें PirB (मनुष्यों में LilrB2 का समकक्ष) नामक रिसेप्टर नहीं था। जब इन चूहों में C4d इंजेक्ट किया गया, तो सिनैप्स का कोई नुकसान नहीं हुआ। इससे यह पुष्टि हुई कि इस विनाशकारी प्रक्रिया के लिए यह रिसेप्टर आवश्यक है।
मौजूदा उपचारों पर नए सवाल
वर्तमान में FDA द्वारा अनुमोदित अधिकांश अल्जाइमर उपचार मस्तिष्क में एमिलॉयड प्लाक को लक्षित करते हैं। हालांकि, उनकी प्रभावशीलता सीमित रही है और कुछ दवाओं, जैसे कि लेकेनेमैब, के गंभीर दुष्प्रभाव भी देखे गए हैं, जिनमें मस्तिष्क में रक्तस्राव और सूजन शामिल है। प्रोफेसर शैट्ज के अनुसार, केवल एमिलॉयड प्लाक को तोड़ना समस्या का अधूरा समाधान है।
यह नया शोध बताता है कि सीधे सिनैप्स को LilrB2 सिग्नलिंग से बचाना एक अधिक प्रभावी रणनीति हो सकती है। इस दृष्टिकोण में, एमिलॉयड बीटा और सूजन केवल ट्रिगर हैं, जबकि वास्तविक नुकसान LilrB2 रिसेप्टर के माध्यम से होता है, जो उपचार के लिए एक बेहतर लक्ष्य हो सकता है।
यह खोज कि एमिलॉयड और सूजन दोनों एक ही रिसेप्टर पर काम करते हैं, अल्जाइमर के उपचार के लिए एक नई श्रेणी की दवाओं का मार्ग खोल सकती है। इन दवाओं का लक्ष्य प्लाक को हटाना नहीं, बल्कि उन स्मृति मार्गों को संरक्षित करना होगा जिन्हें वे नष्ट करने का खतरा पैदा करते हैं।
FAQs
अल्जाइमर रोग में स्मृति हानि का नया कारण क्या पाया गया है?
शोध के अनुसार, अल्जाइमर में न्यूरॉन्स बाहरी संकेतों के कारण स्वयं अपने सिनैप्स (तंत्रिका कनेक्शन) को नष्ट करने लगते हैं, जिसे ‘सिनैप्स प्रूनिंग’ कहा जाता है।
इस शोध में किस रिसेप्टर की पहचान की गई है?
इस शोध में LilrB2 नामक एक रिसेप्टर की पहचान की गई है जो एमिलॉयड बीटा और सूजन संबंधी प्रोटीन दोनों से संकेत प्राप्त करके सिनैप्स को खत्म करने की प्रक्रिया शुरू करता है।
यह खोज इलाज की दिशा कैसे बदल सकती है?
यह खोज उपचार का ध्यान एमिलॉयड प्लाक हटाने से हटाकर सीधे सिनैप्टिक कनेक्शनों की रक्षा करने पर केंद्रित कर सकती है। LilrB2 रिसेप्टर को लक्षित करना एक नई thérapeutique रणनीति हो सकती है।
शोध का नेतृत्व किसने किया और यह कहाँ प्रकाशित हुआ?
इस शोध का नेतृत्व स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय की प्रोफेसर कार्ला शैट्ज ने किया और इसके निष्कर्ष PNAS (प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज) नामक वैज्ञानिक पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं।
एमिलॉयड बीटा और सूजन इस प्रक्रिया में कैसे शामिल हैं?
एमिलॉयड बीटा और सूजन से जुड़ा प्रोटीन C4d, दोनों LilrB2 रिसेप्टर से जुड़ते हैं और उसे सक्रिय करते हैं, जो न्यूरॉन्स को अपने सिनैप्स को खत्म करने का संकेत देता है। वे इस विनाशकारी मार्ग के लिए ट्रिगर के रूप में काम करते हैं।
यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।


