“सेल अमेरिका” ट्रेड की धारणा को लेकर बहस जारी है, जिसमें इस बात पर दो विपरीत विचार हैं कि क्या विदेशी निवेशक अमेरिकी संपत्तियों से अपना पैसा निकाल रहे हैं। हालांकि, उपलब्ध आंकड़े एक अलग कहानी पेश करते हैं, जो दर्शाते हैं कि विदेशी निवेशकों ने लगातार अमेरिकी संपत्तियों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है।
हालिया आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशक 2018 से लगातार लंबी अवधि की अमेरिकी संपत्तियों के शुद्ध खरीदार बने हुए हैं। इसका मतलब है कि उन्होंने जितनी संपत्ति बेची है, उससे कहीं ज़्यादा खरीदी है। यह प्रवृत्ति अप्रैल 2024 तक जारी रही है।
निवेश की यह निरंतरता उस विचार को चुनौती देती है जिसके तहत यह कहा जा रहा है कि वैश्विक निवेशक अमेरिका से दूरी बना रहे हैं। आंकड़ों से पता चलता है कि 2020 और 2021 में यह खरीदारी विशेष रूप से मजबूत थी, जब शुद्ध निवेश एक ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर गया था।
विदेशी निवेश के आंकड़े
आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों द्वारा लंबी अवधि की अमेरिकी संपत्तियों की शुद्ध खरीदारी का वार्षिक विवरण इस प्रकार है: 2018 में 178 बिलियन डॉलर, 2019 में 354 बिलियन डॉलर, 2020 में 1,057 बिलियन डॉलर और 2021 में 1,202 बिलियन डॉलर की शुद्ध खरीदारी की गई।
इसके बाद के वर्षों में भी यह सिलसिला जारी रहा, हालांकि इसमें कुछ उतार-चढ़ाव देखा गया। 2022 में विदेशी निवेशकों ने 387 बिलियन डॉलर की शुद्ध खरीदारी की, जबकि 2023 में यह आंकड़ा बढ़कर 638 बिलियन डॉलर हो गया। इस वर्ष अप्रैल 2024 तक, विदेशियों ने पहले ही 251 बिलियन डॉलर की शुद्ध खरीदारी कर ली है।
“सेल अमेरिका” ट्रेड पर दो मत
“सेल अमेरिका” ट्रेड एक ऐसी अवधारणा है जिसमें यह माना जाता है कि विदेशी निवेशक अमेरिकी अर्थव्यवस्था में विश्वास खो रहे हैं और इसलिए वे अमेरिकी बांड, स्टॉक और अन्य संपत्तियों को बेच रहे हैं। इस विषय पर विशेषज्ञों और बाजार विश्लेषकों के बीच दो अलग-अलग मत हैं।
एक पक्ष का मानना है कि यह प्रवृत्ति हो रही है, जबकि दूसरा पक्ष आंकड़ों का हवाला देते हुए इसे खारिज करता है। उपलब्ध डेटा, जो 2018 से लगातार शुद्ध खरीदारी दर्शाता है, इस धारणा का समर्थन नहीं करता है कि विदेशी निवेशक बड़े पैमाने पर अमेरिकी संपत्तियों से बाहर निकल रहे हैं।
क्या हैं दीर्घकालिक अमेरिकी संपत्तियां
दीर्घकालिक अमेरिकी संपत्तियां वे वित्तीय साधन हैं जिन्हें निवेशक आमतौर पर एक वर्ष से अधिक समय तक रखने के इरादे से खरीदते हैं। इनमें मुख्य रूप से अमेरिकी ट्रेजरी बांड (सरकारी बॉन्ड), कॉरपोरेट बॉन्ड और अमेरिकी कंपनियों के शेयर बाजार में सूचीबद्ध स्टॉक शामिल होते हैं।
इन संपत्तियों में विदेशी निवेश को अमेरिकी अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य और स्थिरता में वैश्विक विश्वास का एक महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। जब विदेशी इन संपत्तियों को खरीदते हैं, तो यह अमेरिकी डॉलर और वित्तीय बाजारों में उनके भरोसे को दर्शाता है।
संक्षेप में, “सेल अमेरिका” ट्रेड को लेकर चल रही चर्चाओं के बावजूद, 2018 से अप्रैल 2024 तक के आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि विदेशी निवेशक अमेरिकी लंबी अवधि की संपत्तियों के लगातार शुद्ध खरीदार बने हुए हैं। हालांकि हर साल खरीद की मात्रा में बदलाव आया है, लेकिन कुल मिलाकर रुझान बिक्री के बजाय खरीदारी का रहा है।
FAQs
“सेल अमेरिका” ट्रेड की धारणा क्या है?
“सेल अमेरिका” ट्रेड एक विचार है जिसके अनुसार वैश्विक निवेशक विभिन्न कारणों से अमेरिकी संपत्तियों, जैसे स्टॉक और बांड, को बेच रहे हैं। हालांकि, इस धारणा के होने या न होने पर दो विपरीत मत हैं।
अमेरिकी संपत्तियों में विदेशी निवेश पर ताज़ा आंकड़े क्या दर्शाते हैं?
आंकड़े दर्शाते हैं कि विदेशी निवेशक 2018 से लगातार लंबी अवधि की अमेरिकी संपत्तियों के शुद्ध खरीदार रहे हैं। अप्रैल 2024 तक, उन्होंने 251 बिलियन डॉलर की शुद्ध खरीदारी की है।
किस वर्ष में विदेशियों द्वारा सबसे अधिक शुद्ध खरीदारी देखी गई?
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2021 में विदेशी निवेशकों द्वारा सबसे अधिक 1,202 बिलियन डॉलर (1.202 ट्रिलियन डॉलर) की शुद्ध खरीदारी की गई थी।
दीर्घकालिक अमेरिकी संपत्तियां क्या होती हैं?
दीर्घकालिक अमेरिकी संपत्तियों में आमतौर पर अमेरिकी ट्रेजरी बांड, कॉरपोरेट बांड और अमेरिकी कंपनियों के स्टॉक शामिल होते हैं, जिन्हें एक वर्ष से अधिक समय तक रखने के लिए खरीदा जाता है।
शुद्ध खरीदार होने का क्या मतलब है?
शुद्ध खरीदार होने का मतलब है कि एक निश्चित अवधि में किसी निवेशक या निवेशक समूह द्वारा खरीदी गई संपत्तियों का कुल मूल्य उनके द्वारा बेची गई संपत्तियों के कुल मूल्य से अधिक है।
यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।


