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अमेरिका की नई रक्षा रणनीति ऑस्ट्रेलिया से करेगी और ज़्यादा मांग

ट्रम्प प्रशासन द्वारा जारी की गई नई अमेरिकी राष्ट्रीय रक्षा रणनीति (NDS) में ऑस्ट्रेलिया जैसे सहयोगियों से रक्षा खर्च और क्षमता विकास में अधिक योगदान की अपेक्षा की गई है। यह रणनीति इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिकी नेतृत्व वाली सामूहिक रक्षा और “डिनायल द्वारा प्रतिरोध” की नीति को मजबूत करने पर केंद्रित है, विशेष रूप से पहली द्वीप श्रृंखला के साथ।

23 जनवरी को जारी इस दस्तावेज़ में यह स्पष्ट किया गया है कि अमेरिका अलगाववाद की ओर नहीं बढ़ रहा है, बल्कि एक “ऑफशोर-बैलेंसर” की भूमिका अपना रहा है। इस दृष्टिकोण के तहत, यह उम्मीद की जाती है कि अमेरिकी सहयोगी सामूहिक रक्षा सुनिश्चित करने में बड़ी भूमिका निभाएंगे। इसके परिणामस्वरूप ऑस्ट्रेलियाई रक्षा बल (ADF) से अमेरिकी अपेक्षाएं बढ़ गई हैं।

यह रणनीति चीन के साथ रणनीतिक स्थिरता बनाने का प्रयास करती है, जिसमें संघर्ष टालने और तनाव कम करने को बढ़ावा दिया गया है ताकि एक “सभ्य शांति” स्थापित हो सके। यह दृष्टिकोण “शांति से शक्ति” के सिद्धांत पर आधारित है और सहयोगियों की मदद से पहली द्वीप श्रृंखला पर केंद्रित एक “डिनायल” रणनीति का समर्थन करता है।

नई रक्षा रणनीति में सहयोगियों और भागीदारों के साथ बोझ साझा करने पर जोर दिया गया है, जिसमें वे अपनी रक्षा की प्राथमिक जिम्मेदारी स्वयं लेंगे और अमेरिका “महत्वपूर्ण लेकिन अधिक सीमित समर्थन” प्रदान करेगा। इसमें दक्षिण कोरिया जैसे देशों के लिए स्पष्ट निहितार्थ हैं, जिनसे उत्तर कोरिया को रोकने की प्राथमिक जिम्मेदारी लेने की अपेक्षा की गई है।

नई अमेरिकी रक्षा रणनीति का अनावरण

ट्रम्प प्रशासन ने 23 जनवरी को अपनी राष्ट्रीय रक्षा रणनीति (NDS) जारी की। यह दस्तावेज़ अमेरिकी रक्षा नीति की दिशा तय करता है और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के प्रति देश के दृष्टिकोण को रेखांकित करता है। इस रणनीति में एक प्रमुख बदलाव यह है कि अमेरिका अपनी भूमिका को एक “ऑफशोर-बैलेंसर” के रूप में देख रहा है।

इसका अर्थ है कि अमेरिका सीधे तौर पर हर संघर्ष में हस्तक्षेप करने के बजाय, अपने सहयोगियों को अपनी रक्षा के लिए अधिक सक्षम और जिम्मेदार बनने के लिए प्रोत्साहित करेगा। इस नीति के तहत, ऑस्ट्रेलियाई रक्षा बल जैसे सहयोगी बलों से अपनी क्षमताओं को बढ़ाने और सामूहिक सुरक्षा प्रयासों में अधिक सक्रिय रूप से भाग लेने की उम्मीद की जाती है।

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर विशेष ध्यान

NDS इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा को एक प्रमुख प्राथमिकता के रूप में पहचानती है। रणनीति चीन के साथ रणनीतिक स्थिरता बनाने का लक्ष्य रखती है, लेकिन यह “शांति से शक्ति” के सिद्धांत पर आधारित है। इसका एक मुख्य उद्देश्य चीन को अमेरिकी सहयोगियों पर हावी होने से रोकना है।

इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, NDS “डिनायल द्वारा प्रतिरोध” की रणनीति पर जोर देती है, जो मुख्य रूप से पहली द्वीप श्रृंखला पर केंद्रित है। पहली द्वीप श्रृंखला जापान से लेकर ताइवान और फिलीपींस तक फैली द्वीपों की एक श्रृंखला है, जिसे चीन के लिए प्रशांत महासागर तक पहुंच को नियंत्रित करने के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। अमेरिका इस रणनीति में अपने सहयोगियों और भागीदारों का समर्थन चाहता है।

सहयोगियों के लिए रक्षा खर्च का नया मानक

NDS “मॉडल सहयोगियों” की अवधारणा को परिभाषित करती है – वे देश जो अपनी आवश्यकता के अनुसार खर्च कर रहे हैं और अपने क्षेत्रों में खतरों के खिलाफ सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। दस्तावेज़ में NATO पर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 3.5% मुख्य सैन्य खर्च और 1.5% सुरक्षा-संबंधी खर्चों पर, यानी कुल 5% रक्षा पर खर्च करने के लिए डाले गए दबाव का उल्लेख है।

रणनीति में कहा गया है कि अमेरिका “दुनिया भर में हमारे सहयोगियों और भागीदारों से इस मानक को पूरा करने की वकालत करेगा, न कि केवल यूरोप में।” यह ऑस्ट्रेलिया के लिए महत्वपूर्ण है, जिसका वर्तमान रक्षा खर्च GDP का 2.05% है और 2033 तक इसके 2.33% तक बढ़ने का अनुमान है। ऑस्ट्रेलियाई सरकार का तर्क है कि क्षमता और सामर्थ्य, GDP के प्रतिशत से अधिक महत्वपूर्ण संकेतक हैं।

ताइवान का उल्लेख और रणनीतिक निहितार्थ

हालांकि NDS दस्तावेज़ में ताइवान का कोई सीधा उल्लेख नहीं है, लेकिन 2025 की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति (NSS), जिस पर NDS आधारित है, में इसका कई बार उल्लेख किया गया है। NSS में पहली द्वीप श्रृंखला के साथ सामूहिक रक्षा के महत्व पर जोर दिया गया है, जिसे “ताइवान पर कब्जा करने के किसी भी प्रयास को विफल करने के लिए अमेरिका और सहयोगियों की क्षमता को मजबूत करने” के एक कदम के रूप में देखा जाता है।

दोनों दस्तावेज़ पहली द्वीप श्रृंखला पर “डिनायल द्वारा प्रतिरोध” की रणनीति को सुदृढ़ करते हैं, जिसके भू-रणनीतिक केंद्र में ताइवान स्थित है। NDS में ताइवान का उल्लेख न होना सहयोगियों के बीच चिंता का विषय बन सकता है।

ऑस्ट्रेलिया के लिए औद्योगिक सहयोग के अवसर

इस नई रणनीति के तहत ऑस्ट्रेलिया के लिए अमेरिका और अन्य भागीदारों के साथ मिलकर काम करने के अवसर हैं। इसमें अमेरिकी रक्षा औद्योगिक आधार को “सुपरचार्ज” करने में मदद करना भी शामिल है। ऑस्ट्रेलिया अपनी जहाज निर्माण क्षमता का विस्तार करके, विशेष रूप से पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में हेंडरसन सुविधा पर ध्यान केंद्रित करके, अमेरिकी जहाज निर्माण आवश्यकताओं का समर्थन कर सकता है।

इसके अतिरिक्त, AUKUS पिलर टू के माध्यम से उच्च प्रौद्योगिकी उपकरणों और क्षमताओं का स्थानीय उत्पादन, अमेरिका और उसके सहयोगियों के रक्षा औद्योगिक लचीलेपन को मजबूत कर सकता है। इससे लंबी अवधि के संघर्ष के लिए तैयारी और स्थिरता में भी वृद्धि होगी।

नई अमेरिकी राष्ट्रीय रक्षा रणनीति अमेरिका की वैश्विक भूमिका में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देती है, जिसमें इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सामूहिक सुरक्षा के लिए सहयोगियों पर अधिक जिम्मेदारी और वित्तीय प्रतिबद्धता की अपेक्षा की गई है। यह ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों को अपनी रक्षा क्षमताओं और खर्च की समीक्षा करने के लिए प्रेरित करता है ताकि वे बदली हुई रणनीतिक वास्तविकताओं के अनुकूल हो सकें।

FAQs

नई अमेरिकी राष्ट्रीय रक्षा रणनीति (NDS) क्या है?

यह अमेरिकी रक्षा विभाग द्वारा जारी एक आधिकारिक दस्तावेज़ है जो देश के सैन्य उद्देश्यों, प्राथमिकताओं और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की रणनीति को रेखांकित करता है। यह अमेरिकी सेना के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में कार्य करता है।

“डिनायल द्वारा प्रतिरोध” का क्या अर्थ है?

यह एक सैन्य रणनीति है जिसका उद्देश्य किसी विरोधी को यह विश्वास दिलाकर आक्रमण करने से रोकना है कि उसका हमला अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने में विफल रहेगा। इसका लक्ष्य आक्रमण को निरर्थक बनाना है, न कि केवल दंडात्मक कार्रवाई की धमकी देना।

“पहली द्वीप श्रृंखला” क्या है?

यह प्रशांत महासागर में द्वीपों की एक श्रृंखला है जो जापान के कुरील द्वीपों से शुरू होकर, जापानी द्वीपसमूह, ताइवान, फिलीपींस से होते हुए बोर्नियो तक फैली हुई है। इसे चीन की समुद्री पहुंच को नियंत्रित करने के लिए एक महत्वपूर्ण भू-रणनीतिक रेखा माना जाता है।

NDS सहयोगियों से क्या रक्षा खर्च की अपेक्षा करती है?

NDS NATO के लिए निर्धारित मानक का हवाला देती है, जिसमें GDP का कुल 5% रक्षा पर खर्च करना शामिल है। दस्तावेज़ में कहा गया है कि अमेरिका दुनिया भर के सहयोगियों से इस मानक को पूरा करने की वकालत करेगा।

NDS में ऑस्ट्रेलिया का उल्लेख कैसे किया गया है?

दस्तावेज़ में ऑस्ट्रेलिया का नाम लेकर सीधे तौर पर उल्लेख नहीं किया गया है। हालांकि, “मॉडल सहयोगियों” के लिए निर्धारित अपेक्षाएं और इंडो-पैसिफिक पर ध्यान केंद्रित करने की नीति का सीधा असर ऑस्ट्रेलिया की रक्षा नीति और खर्च पर पड़ता है।

यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।

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