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अपोलो हेल्थ डायलॉग: रोगी सुरक्षा पर वैश्विक सोच को आकार देने में भारत की भूमिका उजागर

अपोलो हॉस्पिटल्स इंटरनेशनल हेल्थ डायलॉग (IHD) 2026 के उद्घाटन दिवस पर मरीज सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवा शासन पर वैश्विक सोच को आकार देने में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला गया। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन सुरक्षित और अधिक न्यायसंगत स्वास्थ्य प्रणालियों के निर्माण के तरीकों पर चर्चा करने के लिए किया गया था।

इस कार्यक्रम में डॉक्टरों, नीति-निर्माताओं, डिजिटल स्वास्थ्य पेशेवरों और विभिन्न विशेषज्ञों ने भाग लिया। “Global Voices, One Vision” थीम के साथ आयोजित इस सम्मेलन के पहले दिन का मुख्य केंद्र बिंदु मरीज सुरक्षा था, जिसे केवल एक नैदानिक चिंता के बजाय नेतृत्व और शासन के एक महत्वपूर्ण मुद्दे के रूप में प्रस्तुत किया गया।

वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के साथ-साथ गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही में लगातार सुधार करने का भारत का अनुभव वैश्विक स्वास्थ्य नीति चर्चाओं और रोगी सुरक्षा ढांचे को प्रभावित कर रहा है। यह संवाद दुनिया भर की स्वास्थ्य प्रणालियों के बीच सीखने को प्रोत्साहित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य करता है।

सम्मेलन का उद्देश्य और भागीदारी

अपोलो हॉस्पिटल्स ग्रुप की संयुक्त प्रबंध निदेशक डॉ. संगीता रेड्डी ने बताया कि इंटरनेशनल हेल्थ डायलॉग को दुनिया भर की स्वास्थ्य प्रणालियों से सीखने को प्रोत्साहित करने के लिए बनाया गया था। उन्होंने कहा कि IHD 2026 में 5,000 से अधिक पंजीकरण और विश्व स्तर पर 75 संस्थानों की भागीदारी देखी गई, जो भारत के स्वास्थ्य सेवा मॉडल में बढ़ती अंतरराष्ट्रीय रुचि का संकेत है। उन्होंने यह भी कहा, “मरीज सुरक्षा अब कोई स्थानीय मुद्दा नहीं है। यह एक साझा वैश्विक जिम्मेदारी है।”

नीति और प्रौद्योगिकी की भूमिका

विशेष मुख्य सचिव डॉ. जयेश रंजन ने मरीज सुरक्षा में सार्वजनिक नीति और समावेशिता के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि समाधान वास्तविक दुनिया की विविधता को प्रतिबिंबित करने वाले होने चाहिए और इस बात पर जोर दिया कि डिजिटल स्वास्थ्य पहलों को समान पहुंच सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि प्रौद्योगिकी-संचालित सुरक्षा उपाय समाज के सभी वर्गों तक पहुंच सकें। भारत सरकार की आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन जैसी पहल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवा तक डिजिटल पहुंच को सुगम बनाना है।

संगठनात्मक संस्कृति में मरीज सुरक्षा

अपोलो हॉस्पिटल्स के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. मधु शशिधर ने कहा कि मरीज सुरक्षा रोजमर्रा की संगठनात्मक प्रथा का हिस्सा होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “इसे एक विभाग पर नहीं छोड़ा जा सकता,” और यह भी जोड़ा कि इसका “नेतृत्व शीर्ष से किया जाना चाहिए।” वैश्विक विशेषज्ञों ने “सेफ्टी क्लटर” के प्रति भी आगाह किया, जिसका अर्थ है अत्यधिक चेकलिस्ट जो रोगी के परिणामों में सुधार किए बिना कर्मचारियों के कार्यभार को बढ़ाती हैं।

गुणवत्ता मानक और ‘शून्य हानि’ का लक्ष्य

मरीज सुरक्षा के लक्ष्य को दोहराते हुए, नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (NABH) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. अतुल मोहन कोचर ने कहा, “शून्य हानि ही एकमात्र स्वीकार्य संख्या है।” NABH भारत में अस्पतालों के लिए गुणवत्ता और सुरक्षा मानक स्थापित करने वाली प्रमुख संस्था है, जो स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को रोगी-केंद्रित देखभाल प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित करती है। इसका अंतिम लक्ष्य स्वास्थ्य सेवाओं के दौरान रोगियों को किसी भी प्रकार की हानि से बचाना है।

यह सम्मेलन इस बात पर प्रकाश डालता है कि कैसे भारत का स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र न केवल अपनी विशाल आबादी की सेवा कर रहा है, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य मानकों के लिए एक उदाहरण भी स्थापित कर रहा है। मरीज सुरक्षा को संगठनात्मक नेतृत्व के मूल में रखने का विचार दुनिया भर में स्वास्थ्य प्रणालियों के लिए एक महत्वपूर्ण सीख है।

FAQs

IHD 2026 सम्मेलन की थीम क्या थी?

इस कार्यक्रम की थीम “Global Voices, One Vision” थी, जिसका उद्देश्य दुनिया भर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों को एक मंच पर लाना था।

इंटरनेशनल हेल्थ डायलॉग 2026 का आयोजन किसने किया?

इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन अपोलो हॉस्पिटल्स द्वारा किया गया था।

सम्मेलन के उद्घाटन दिवस का मुख्य फोकस क्या था?

उद्घाटन दिवस का मुख्य फोकस मरीज सुरक्षा को एक नेतृत्व और शासन के मुद्दे के रूप में स्थापित करना था, न कि केवल एक नैदानिक चिंता के रूप में।

इस कार्यक्रम में कितने पंजीकरण हुए?

डॉ. संगीता रेड्डी के अनुसार, IHD 2026 में 5,000 से अधिक पंजीकरण हुए और 75 वैश्विक संस्थानों ने इसमें भाग लिया।

NABH के सीईओ ने मरीज सुरक्षा के लिए क्या लक्ष्य बताया?

NABH के सीईओ डॉ. अतुल मोहन कोचर ने कहा कि मरीज सुरक्षा का लक्ष्य “शून्य हानि” है, जो एकमात्र स्वीकार्य संख्या है।

यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।

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